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Kanoon Shayari

Hamara kanoon hamara swabhimaan hai, par insaaf sabko kahan milta hai.

Kanoon shayari mein apna samvidhan aur apna kanoon hi apna asli swabhimaan hone ki baat kahi gayi hai. Isi swabhimaan mein Nyay shayari bhi padhein.

अपना गणतंत्र अपना संविधान

हमारा कानून हमारा स्वाभिमान…

Apna Ganatantr apna sanvidhaan,
Hamara kanoon hamara svaabhimaan !!

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वो रोटी चुरा के चोर हो गया,
लोग मुल्क खा गए, कानून लिखते लिखते !!

Vo rotee chura ke chor ho gaya,
Log mulk kha gae, kaanoon likhate likhate !!

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Frequently Asked Questions

'अपना गणतंत्र अपना संविधान' वाली शायरी में कानून को क्या दर्जा दिया गया है?
एक देशभक्ति भरी शायरी में कहा गया है, "अपना गणतंत्र अपना संविधान, हमारा कानून हमारा स्वाभिमान।" यह कानून और संविधान को देश के स्वाभिमान और गर्व का प्रतीक मानती है, जो हर नागरिक की पहचान से जुड़ा है।
रोटी चुराने वाले चोर की शायरी में कानून पर क्या तंज़ है?
एक तीखा शेर कहता है, "वो रोटी चुरा के चोर हो गया, लोग मुल्क खा गए, कानून लिखते लिखते!!" यह उस विडंबना पर व्यंग्य करता है जहाँ छोटी ज़रूरत से चोरी करने वाला दोषी बन जाता है, जबकि बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार करने वाले कानून बनाने की कुर्सी पर ही बैठे रहते हैं। न्याय से जुड़े ऐसे भाव Nyay सेक्शन में भी मिलते हैं।
कानून शायरी किन अन्य विषयों से जुड़ी है?
कानून का विषय स्वाभाविक रूप से इंसाफ, अदालत और अपराध जैसे विषयों से जुड़ा है। इससे संबंधित Insaaf और Nyayalay जैसी शायरी भी इस साइट पर पढ़ी जा सकती है।

Ek sher yahan roti churane wala chor ban jaata hai jabki bade log poora mulk kha jaate hain, kanoon likhte likhte, is tanz bhare andaaz mein. Aage Insaaf aur Mujrim shayari bhi padhein.