Dagabaaz Shayari
Jo mehsoos karte hain bayan kar dete hain, lafzon ki dagabaazi hamse nahi hoti.
Dagabaaz shayari mein imaandari ka ek saaf ikraar hai ki jo bhi mehsoos hota hai wahi bayan kar diya jaata hai, lafzon ki dagabaazi kabhi nahi ki jaati. Isi ikraar mein Mehsoos shayari bhi padhein.
जो महसूस करते हैं बयाँ कर देते हैं...
हमसे लफ़्ज़ों की दगाबाज़ी नहीं होती...!!
Jo mahasoos karate hain bayaan kar dete hain...
Hamase lafzon kee dagaabaazee nahin hotee...!!
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Frequently Asked Questions
दगाबाज़ शायरी की यह पंक्ति किस बात पर जोर देती है?
यह पंक्ति ईमानदारी और सच्चाई की बात करती है, यह बताते हुए कि शायर जो भी महसूस करता है वही बयां करता है, शब्दों से किसी को धोखा नहीं देता। शेर है, "जो महसूस करते हैं बयाँ कर देते हैं... हमसे लफ़्ज़ों की दगाबाज़ी नहीं होती...!!" यह सीधी और साफ भावना Mehsoos से जुड़ी शायरी की खासियत है।
"लफ़्ज़ों की दगाबाज़ी" का क्या मतलब है?
इसका मतलब है शब्दों के जरिए किसी को धोखा देना, यानी दिल में कुछ और और ज़ुबान पर कुछ और कहना। यह शेर Ham यानी खुद को उस दगाबाज़ी से अलग बताता है, यह दिखाते हुए कि सच्ची शायरी दिल की सीधी आवाज़ होती है, कोई बनावटी खेल नहीं।
