किस लुत्फ़ से झुंझला के वो कहते हैं शब ए वस्ल
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किस लुत्फ़ से झुंझला के वो कहते हैं शब-ए-वस्ल
ज़ालिम तेरी आँखों से गयी नींद किधर आज !!
(शब-ए-वस्ल = मिलन की रात)
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किस लुत्फ़ से झुंझला के वो कहते हैं शब-ए-वस्ल
ज़ालिम तेरी आँखों से गयी नींद किधर आज !!
(शब-ए-वस्ल = मिलन की रात)
Kis lutf se jhunjhla ke wo kahte hain shab-e-vasl
Zaalim teri aankhon se gayi neend kidhar aaj
