कई बार रक़ीबों ने मारे मुझे खंज़र
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कई बार रक़ीबों ने मारे मुझे खंज़र
हर बार मैंने हँसकर ख़ुद को सँवारा है
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कई बार रक़ीबों ने मारे मुझे खंज़र
हर बार मैंने हँसकर ख़ुद को सँवारा है
Kaee baar raqeebon ne maare mujhe khanzar
Har baar mainne hansakar khud ko sanvaara hai
Today's Shayari
इल्ज़ाम तो हर हाल में काँटों पे ही लगेगा,
ये सोचकर अक्सर फूल भी चुपचाप ज़ख्म दे जातें हैं !
Today's Joke
दामाद ससुर सेः पापाजी आपकी लाडली ने नाक में दम कर रखा है..!
ससुरः बेटा मेरे बारे में सोचो.. मेरे...
Today's Status
Life is like a book. Each day like a new page. So let the first words you write be Good...
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