अन्याय के रूप में अब नेताओं का भ्रष्टाचार हैं
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अन्याय के रूप में अब नेताओं का भ्रष्टाचार हैं,
रावण के रूप में नेताओं का अत्याचार हैं,
भ्रष्टाचार और अत्याचार मिटाने के लिए शंख बजेगा,
अब हर घर से एक राम निकलेगा.
Anyaay ke roop mein ab netaon ka bhrashtaachaar hain,
Raavan ke roop mein netaon ka atyaachaar hain,
Bhrashtaachaar aur atyaachaar mitaane ke lie shankh bajega,
Ab har ghar se ek raam nikalega.
Today's Shayari
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ये सोचकर अक्सर फूल भी चुपचाप ज़ख्म दे जातें हैं !
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