शायर कहकर बदनाम ना कर
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शायर कहकर बदनाम ना कर,
मैं तो रोज़ शाम को दिनभर का ‘हिसाब’ लिखता हूँ
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शायर कहकर बदनाम ना कर,
मैं तो रोज़ शाम को दिनभर का ‘हिसाब’ लिखता हूँ
Shaayar kahakar badanaam na kar,
Main to roz shaam ko dinabhar ka ‘hisaab’ likhata hoon
