वाह वाह कर के सब दूर हो जाते हे धीरे धीरे
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वाह-वाह, कर के सब दूर हो जाते हे धीरे-धीरे,
ये लफ्ज़ कैसे निकलते हे जहन से ,
जानने की तकलीफ कौन करता हे साहब.
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वाह-वाह, कर के सब दूर हो जाते हे धीरे-धीरे,
ये लफ्ज़ कैसे निकलते हे जहन से ,
जानने की तकलीफ कौन करता हे साहब.
Vaah-vaah, kar ke sab door ho jaate he dheere-dheere,
Ye laphz kaise nikalate he jahan se ,
Jaanane kee takaleeph kaun karata he saahab.
Today's Shayari
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