औक़ात नहीं थी जमाने की
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औक़ात नहीं थी जमाने की
जो मेरी कीमत लगा सके,
कबख़्त इश्क में क्या गिरे
मुफ़्त में नीलाम हो गए।
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औक़ात नहीं थी जमाने की
जो मेरी कीमत लगा सके,
कबख़्त इश्क में क्या गिरे
मुफ़्त में नीलाम हो गए।
Aukat Nahi Thi Jamaane Ki
Jo Meri Keemat Laga Sake,
Kambakht Ishq Mein Kya Gire
Muft Mein Neelam Ho Gaye.
Today's Shayari
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ये सोचकर अक्सर फूल भी चुपचाप ज़ख्म दे जातें हैं !
Today's Joke
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Today's Status
Life is like a book. Each day like a new page. So let the first words you write be Good...
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