औक़ात नहीं थी जमाने की
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औक़ात नहीं थी जमाने की
जो मेरी कीमत लगा सके,
कबख़्त इश्क में क्या गिरे
मुफ़्त में नीलाम हो गए।
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औक़ात नहीं थी जमाने की
जो मेरी कीमत लगा सके,
कबख़्त इश्क में क्या गिरे
मुफ़्त में नीलाम हो गए।
Aukat Nahi Thi Jamaane Ki
Jo Meri Keemat Laga Sake,
Kambakht Ishq Mein Kya Gire
Muft Mein Neelam Ho Gaye.
