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Tanashahi Shayari

Tamasha hai ya tanashahi, koi bataye ek baar.

Tanashahi shayari mein ek tikha sawaal hai ki har roz apni hi baaton ko badalne lage sarkar yahan, tamasha hai ya phir tanashahi koi bataye ek baar. Isi soch mein Badalne shayari bhi padhein.

हर रोज अपनी ही बातो को बदलने लगें सरकार यहां ,
तमाशा है या फिर तानाशाह कोई बताए एक बार यहां ।

Har roj apanee hee baato ko badalane lagen sarakaar yahaan ,
Tamaasha hai ya phir taanaashaah koee batae ek baar yahaan .

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Frequently Asked Questions

सरकार के रोज़ बदलते बयानों पर यह शायरी क्या तंज़ कसती है?
"हर रोज अपनी ही बातो को Badalne लगें सरकार यहां, तमाशा है या फिर तानाशाह कोई बताए एक बार यहां" पंक्ति एक सामान्य सामाजिक टिप्पणी है — यह बिना किसी खास पार्टी का नाम लिए, बार-बार अपना रुख बदलने वाली सत्ता-व्यवस्था पर आम जनता की आम निराशा को शब्द देती है।
"तमाशा है या तानाशाह" वाली पंक्ति में जनता की कौन सी उलझन झलकती है?
यह पंक्ति सवाल उठाती है कि रोज़-रोज़ बदलते बयान महज़ एक तमाशा हैं या फिर मनमानी सत्ता का संकेत — यह आम आदमी की उस उलझन को दिखाती है जो शासन की अस्थिरता और अनिश्चितता से जन्म लेती है, बिना किसी विशेष सरकार या दल पर सीधा आरोप लगाए।

Ek sher yahan badalte wadon aur system par seedha sawaal khada karta hai, jo aam aadmi ke roz-marra ke gusse ko seedhe shabdon mein bayan karta hai.