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Parichay Shayari

Kabhi ek mulakat ka parichay, kabhi Hindustani hone ka fakr.

Parichay shayari mein ek chhoti si baat par khatam hote parichay ka zikr hai, jab log wahi aam raste chunte hain jinse hum bachte hain. Isi bhavna mein Bhool shayari bhi padhein.

बस इतनी सी बात पर हमारा परिचय तमाम होता है,
हम उस रस्ते नहीं जाते जो रास्ता आम होता है.

Bas itanee see baat par hamaara parichay tamaam hota hai,
Ham us raste nahin jaate jo raasta aam hota hai.

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तआरूफ रोग हो जाए तो उसको भूलना बेहतर
तअल्लुक बोझ बन जाये तो उसको छोड़ना अच्छा !!

(तआरूफ = परिचय, जान-पहचान; तअल्लुक = संबंध, संपर्क)

Taaruf rog ban jaye toh usko bhulna behtar
Taaluq bojh ban jaye toh usko todna acchha

Sahir Ludhianvi

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विकसित होता राष्ट्र हमारा,
रंग लाती हर कुर्बानी है
फक्र से अपना परिचय देते,
हम सारे हिन्दोस्तानी है |

Vikasit hota raashtr hamaara,
Rang laatee har kurbaanee hai
Phakr se apana parichay dete,
Ham saare hindostaanee hai |

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Frequently Asked Questions

छोटी सी बात पर परिचय खत्म होने वाली शायरी में क्या भाव है?
एक शायरी में लिखा है, "बस इतनी सी बात पर हमारा परिचय तमाम होता है, हम उस रस्ते नहीं जाते जो रास्ता आम होता है।" यह अपनी अलग राह चुनने और भीड़ के आम रास्ते से हटकर चलने की वजह से बनने-बिगड़ने वाले परिचय की बात करती है।
तआरूफ और तअल्लुक को समझाने वाली परिचय शायरी का क्या मतलब है?
शेर कहता है, "तआरूफ रोग हो जाए तो उसको भूलना बेहतर, तअल्लुक बोझ बन जाये तो उसको छोड़ना अच्छा।" यहाँ तआरूफ यानी परिचय और तअल्लुक यानी संबंध, दोनों को इस तरह समझाया गया है कि अगर पहचान या रिश्ता तकलीफ या बोझ बन जाए तो उससे दूर हो जाना ही बेहतर है।
हिन्दोस्तानी होने पर फख्र जताने वाली परिचय शायरी क्या कहती है?
एक देशभक्ति भरी शायरी कहती है, "विकसित होता राष्ट्र हमारा, रंग लाती हर कुर्बानी है, फक्र से अपना परिचय देते, हम सारे हिन्दोस्तानी है।" यह भारतीय होने के परिचय को गर्व और देश की तरक्की से जोड़ती है।
परिचय शायरी में निजी रिश्तों और देशभक्ति, दोनों भाव मिलते हैं?
हाँ, इस विषय की शायरी में परिचय शब्द कई अर्थों में इस्तेमाल होता है - कभी किसी खास रिश्ते या Dost जैसे नाते की पहचान के लिए, तो कभी पूरे देश और राष्ट्रीयता के फक्र भरे परिचय के लिए। ऐसी विविध रचनाएं Bhool सेक्शन में भी मिलती हैं, जहाँ बिछड़े परिचय को भुलाने का भाव आता है।

Ek sher yahan Hindustani hone ka fakr se apna parichay dene aur rashtra ki har kurbani rang laane ki baat karta hai. Aage Achchha aur Chehara shayari bhi padhein.