Logo - Feel The Words

Maqsad Shayari

Har subah ka ek maqsad hota hai, bewajah kuch nahi hota.

Maqsad shayari mein kisi ke sukoon ki fikar hi apna asli maqsad ban jaati hai, kyunki kisi ki neendon mein dakhal dena kabhi maqsad nahi raha. Isi sukoon mein Dil shayari bhi padhein.

सत्ता नहीं सेवा है सपा का मकसद,
हर दिल में बस जाए यही है असल हसरत !!

Satta nahi seva hai Sapa ka maksad,
Har dil mein bas jaaye yahi hai asal hasrat !!

Read more...

तेरी नींदों में दखल क्यूँ दे भला,
तेरा सुकून ही मेरा मकसद बन गया है।

Teree neendon mein dakhal kyoon de bhala,
Tera sukoon hee mera makasad ban gaya hai.

Read more...

हर सुबह का कोई मकसद होता है
यूँ बेवजह नहीं मिलता कोई किसी से .....

Har subah ka koee makasad hota hai
Yoon bevajah nahin milata koee kisee se .....

Read more...

मुस्कुराने के मकसद न ढूंढ वर्ना जिन्दगी यूँही कट जायेगी...
कभी बेवजह भी मुस्कराकर देख...
तेरे साथ साथ जिंदगी भी मुस्कुराएगी...!!

Muskuraane ke makasad na dhoondh varna jindagee yoonhee kat jaayegee...
Kabhee bevajah bhee muskaraakar dekh...
Tere saath saath jindagee bhee muskuraegee...!!

Read more...

Frequently Asked Questions

समाजवादी पार्टी पर लिखी मकसद शायरी में क्या दावा किया गया है?
"सत्ता नहीं सेवा है सपा का मकसद, हर दिल में बस जाए यही है असल हसरत !!" पंक्तियों में समाजवादी पार्टी (सपा) के समर्थन में यह दावा किया गया है कि उसका उद्देश्य सत्ता नहीं बल्कि सेवा है। यह शायर का अपना राजनीतिक नज़रिया है, न कि कोई सर्वमान्य तथ्य — यह पेज किसी पार्टी विशेष का समर्थन नहीं करता, बल्कि दिखाता है कि "मकसद" शब्द का इस्तेमाल राजनीतिक शायरी में भी कैसे होता है।
'तेरा सुकून ही मेरा मकसद' वाली शायरी में क्या रूमानी भाव है?
"तेरी नींदों में दखल क्यूँ दे भला, तेरा सुकून ही मेरा मकसद बन गया है" पंक्तियाँ एक निस्वार्थ प्रेम भाव दिखाती हैं — जहाँ प्रिय व्यक्ति की नींद और सुकून में खलल न डालना ही असली मकसद बन जाता है। यह भाव Dil शायरी के गहरे प्रेम-भाव से मेल खाता है।
'हर सुबह का मकसद' वाली शायरी में क्या दार्शनिक विचार है?
"हर सुबह का कोई मकसद होता है, यूँ बेवजह नहीं मिलता कोई किसी से ....." पंक्तियों में एक गहरा दार्शनिक भाव है — कि ज़िंदगी में हर दिन और हर मुलाकात के पीछे कोई न कोई वजह ज़रूर होती है, कुछ भी अकारण नहीं होता। यह विचार Bewajah शायरी के मूल भाव से सीधे जुड़ता है।
मुस्कुराने का मकसद न ढूंढने वाली शायरी क्या सीख देती है?
"मुस्कुराने के मकसद न ढूंढ वर्ना जिन्दगी यूँही कट जायेगी...कभी बेवजह भी मुस्कराकर देख...तेरे साथ साथ जिंदगी भी मुस्कुराएगी...!!" पंक्तियाँ एक खूबसूरत सीख देती हैं — कि खुश रहने के लिए वजह ढूँढना ज़रूरी नहीं, कभी-कभी बिना किसी कारण मुस्कुराना ही ज़िंदगी को हल्का बना देता है। यह भाव Muskura शायरी के मूल विषय से मेल खाता है।
इस 'मकसद' शायरी संग्रह में मकसद के कितने रंग दिखाए गए हैं?
यह संग्रह मकसद के कई रूप दिखाता है — राजनीतिक विचारधारा, प्रेम में निस्वार्थ भावना, ज़िंदगी की फ़िलॉसफ़ी और बिना वजह खुश रहने की कला। यह विविधता इसे हर तरह के पाठक के लिए दिलचस्प बनाती है।

Ek sher yahan kehta hai ki har subah ka bhi koi maqsad hota hai, yun hi bewajah koi kisi se nahi milta, to doosra muskurane ki wajah dhoondhna chhodkar bewajah hi muskurane ki salaah deta hai. Aage Bewajah aur Attitude shayari bhi padhein.