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Manch Shayari

Har manch ki shobha aane wale mehmaan se hi hoti hai.

Manch shayari mein kisi khaas mehmaan ke aane par manch roshan ho jaata hai aur har taraf khushi ki khilkhilahat gunj uthti hai. Isi swagat mein Atithi shayari bhi padhein.

साम, दाम, दंड और भेद से बन जाता है सरपंच,
उनके स्वागत के लिए तैयार होता है गाँव का हर मंच.

Saam, daam, dand aur bhed se ban jaata hai Sarpanch
Unke swagat ke lie taiyaar hota hai gaanv ka har manch.

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इस मंच को सभा को ज़रा प्यार दीजिये
थोड़ा प्रशंसकों पर उपकार कीजिये
है नेह निमंत्रण इसे स्वीकार लीजिये
नेता जी आप मंच पर आकर विराजिये !!

Is manch ko sabha ko zara pyaar deejiye
Thoda prashansakon par upakaar keejiye
Hai neh nimantran ise sveekaar leejiye
Neta jee aap manch par aakar viraajiye !!

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मंच रौशन हुआ जगमगाहट मिली
हर्ष आनंद की खिलखिलाहट मिली
आपके आगमन से श्रीमान जी
हर किसी को यहाँ मुस्कराहट मिली।

Manch raushan hua jagamagaahat milee
Harsh aanand kee khilakhilaahat milee
Aapake aagaman se shreemaan jee
Har kisee ko yahaan muskaraahat milee.

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फूल खिलते हैं जब आप मुस्काते हैं
जहाँ जाते हैं चार चाँद लगाते हैं
उस मंच की शोभा के क्या कहने
जहाँ आप जैसे अतिथि आते हैं।

Phool khilate hain jab aap muskaate hain
Jahaan jaate hain chaar chaand lagaate hain
Us manch kee shobha ke kya kahane
Jahaan aap jaise atithi aate hain.

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Atithi Shayari

अनुग्रहीत हैं हम आयोजक
जन जन मन उल्लास छुआ
श्रीमान जी आप पधारे
उपकृत मंच समाज हुआ।

Anugraheet hain ham aayojak
Jan jan man ullaas chhua
Shreemaan jee aap padhaare
Upakrt manch samaaj hua.

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Frequently Asked Questions

साम, दाम, दंड और भेद से सरपंच बनने पर गांव के हर मंच के स्वागत के लिए तैयार होने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"साम, दाम, दंड और भेद से बन जाता है सरपंच, उनके स्वागत के लिए तैयार होता है गाँव का हर मंच." — यह शायरी सामान्य ग्रामीण-राजनीति पर हल्का व्यंग्य करती है — साम, दाम, दंड और भेद से सरपंच बन जाता है, और उसके स्वागत के लिए गांव का हर मंच तैयार रहता है; इसमें किसी खास पार्टी या व्यक्ति का नाम नहीं लिया गया।
नेता जी को प्यार भरे निमंत्रण के साथ मंच पर आकर विराजने की गुज़ारिश करने वाली स्वागत शायरी कौन सी है?
"इस मंच को सभा को ज़रा प्यार दीजिये थोड़ा प्रशंसकों पर उपकार कीजिये है नेह निमंत्रण इसे स्वीकार लीजिये नेता जी आप मंच पर आकर विराजिये !!" — यह स्वागत शायरी मंच और सभा को प्यार देने, प्रशंसकों पर उपकार करने और नेह भरे निमंत्रण के साथ मंच पर विराजने की गुज़ारिश करती है — यह मंच-संचालन की सामान्य स्वागत-शैली है, किसी खास पार्टी से जुड़ी नहीं।
मंच के रौशन होने और श्रीमान जी के आगमन से हर किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट आने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"मंच रौशन हुआ जगमगाहट मिली हर्ष आनंद की खिलखिलाहट मिली आपके आगमन से श्रीमान जी हर किसी को यहाँ मुस्कराहट मिली।" — यह स्वागत शायरी कहती है कि श्रीमान जी के आगमन से मंच रौशन हो उठा और हर्ष व आनंद की खिलखिलाहट से हर किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई।
आपके मुस्काने से फूल खिलने और अतिथि के आगमन से मंच की शोभा बढ़ने की बात कहने वाली स्वागत शायरी कौन सी है?
"फूल खिलते हैं जब आप मुस्काते हैं जहाँ जाते हैं चार चाँद लगाते हैं उस मंच की शोभा के क्या कहने जहाँ आप जैसे अतिथि आते हैं।" — यह स्वागत शायरी कहती है कि आपके मुस्काने से फूल खिलते हैं, और जहां आप जैसे अतिथि आते हैं वहां मंच की शोभा के क्या कहने।
मंच से जुड़ी और शायरी कहाँ पढ़ें?
आप Atithi, Welcome और Pranam शायरी पढ़ सकते हैं।

Ek sher yahan gaon ke har manch ko sarpanch ke swagat ke liye taiyaar batata hai, to doosra aayojakon ki taraf se aabhaar jataata hai. Aage Welcome aur Pranam shayari bhi padhein.