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Laparwahi Shayari

Kabhi kabhi laparwahi hi sabse badi rahat hoti hai.

Laparwahi shayari mein aisi laparwahi ho jaane ki tamanna hai jisse gham ki puri gathri hi bhool jaayein. Isi tamanna mein Kaash shayari bhi padhein.

Laparwahi Shayari - Bewajah Ki Fikar Ke Sher

काश ! ऐसी लापरवाही हो जाये मुझसे की ।
मैं अपनी गम की गठरी कहीं भूल जाऊ ।।

Kaash ! aisee laaparavaahee ho jaaye mujhase kee .
Main apanee gam kee gatharee kaheen bhool jaoo ..

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लापरवाही ही भली है

लापरवाही ही भली है...
परवाह करो तो ठग लेते है लोग...!!

Laparvahi hi bhali hai...
Parvaah karo to thag lete hai log !!

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लापरवाही ही भली है ग़ालिब

लापरवाही ही भली है ग़ालिब..
परवाह करो तो लूट लेते है लोग...

Laaparavaahee hee bhalee hai gaalib..
Paravaah karo to loot lete hai log...

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बिन बताये सो जाते हो...
हद है लापरवाही की...!!!

Bin bataaye so jaate ho...
Had hai laaparavaahee kee...!!!

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Frequently Asked Questions

लापरवाही शायरी में गम भूलने की चाहत कैसे बयां हुई है?
एक शायरी में लिखा है 'काश ! ऐसी लापरवाही हो जाये मुझसे की, मैं अपनी गम की गठरी कहीं भूल जाऊ।' यह काश शायरी उस चाहत को दिखाती है जब इंसान अपने दुख को जानबूझकर भुला देना चाहता है।
क्यों कहा गया है 'लापरवाही ही भली है'?
दो अलग-अलग शायरी में यही भाव दोहराया गया है - 'लापरवाही ही भली है... परवाह करो तो ठग लेते है लोग' और ग़ालिब अंदाज में 'लापरवाही ही भली है ग़ालिब, परवाह करो तो लूट लेते है लोग।' यह दिखाता है कि ज्यादा परवाह करने वालों को अक्सर धोखा मिलता है, इसलिए हल्की लापरवाही बेहतर मानी गई है।
रिश्तों में लापरवाही पर कोई मजेदार शायरी है?
हाँ, एक शायरी में शिकायती अंदाज में कहा गया है 'बिन बताये सो जाते हो... हद है लापरवाही की।' यह हद शायरी जैसे प्यारे रिश्तों में छोटी नाराजगी को हल्के-फुल्के तरीके से दिखाती है।
लापरवाही शायरी में परवाह और धोखे का क्या रिश्ता बताया गया है?
शायरी बताती है कि ज्यादा परवाह करना कभी-कभी लोगों को ठगे जाने का मौका दे देता है, इसलिए परवाह शायरी से अलग यह शायरी थोड़ी लापरवाही को समझदारी बताती है। यह एक तरह की व्यावहारिक जीवन-सलाह है, न कि उदासीनता की वकालत।
लापरवाही शायरी किस फॉर्मेट में लिखी गई है?
ज्यादातर लापरवाही शायरी छोटी, दो-पंक्ति की 2 Line शायरी के रूप में है जो आसानी से याद रह जाती है और शेयर की जा सकती है। कुछ में ग़ालिब के अंदाज़ की झलक भी है, जो इसे क्लासिक शायरी का रंग देती है।

Ek sher yahan parwah karne walon ko hi thag liye jaane ka mazakiya taana deta hai, to doosra bina bataye so jaane ko laparwahi ki had batata hai. Aage Had aur Bhool shayari bhi padhein.