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Dawat Shayari

Dosti ki dawat ho to chatni aur momos hi kaafi hain.

Dawat shayari mein doston ki mehfil sajaakar chatni aur ghar ke bane momos ki dawat dene ka mazedaar andaaz milta hai, ye pal dosti ko aur meetha bana deta hai. Isi mazedaar mahaul mein Dost shayari bhi padhein.

तम्बाकू की आदत,
यानी कैंसर को दावत !!

Tambaakoo kee aadat,
Yaanee Cancer ko daavat !!

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आज दोस्तों की महफ़िल सजाते है,
दावत पर खुशियों को बुलाते है,
तुम बढ़िया चटनी का बदोबस्त करो
हम घर का बना मोमोज लाते है.

Aaj doston kee mahafil sajaate hai,
Daavat par khushiyon ko bulaate hai,
Tum badhiya chatanee ka badobast karo
Ham ghar ka bana momoj laate hai.

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जमाने की अदावत का सबब थी दोस्ती जिनकी
अब उनको दुश्मनी है हमसे, दुनिया इसको कहते हैं

Jamaane kee adaavat ka sabab thee dostee jinakee
Ab unako dushmanee hai hamase, duniya isako kahate hain

Bekhud Dehlvi

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Frequently Asked Questions

दावत शायरी में यह शब्द किन-किन संदर्भों में इस्तेमाल होता है?
दावत शायरी में यह शब्द दोस्तों की महफ़िल और खुशियों के जश्न से लेकर किसी बुरी आदत को खतरे का न्यौता बताने वाले व्यंग्य तक, अलग-अलग अंदाज़ में इस्तेमाल होता है।
तंबाकू की आदत को कैंसर की दावत क्यों कहा गया है?
'तम्बाकू की आदत, यानी कैंसर को दावत' जैसी दो-पंक्ति की शायरी चेतावनी भरे अंदाज़ में बताती है कि बुरी आदतें दरअसल बीमारियों को खुला न्यौता देने जैसी हैं।
दोस्तों की दावत पर लिखी शायरी किस तरह का माहौल दिखाती है?
'आज दोस्तों की महफ़िल सजाते है, दावत पर खुशियों को बुलाते है, तुम बढ़िया चटनी का बदोबस्त करो हम घर का बना मोमोज लाते है' पंक्ति में दोस्तों के साथ मिलकर घर पर छोटी सी दावत सजाने की अपनेपन भरी खुशी झलकती है।
दावत और अदावत जैसे मिलते-जुलते शब्दों पर शायरी में क्या श्लेष मिलता है?
'जमाने की अदावत का सबब थी दोस्ती जिनकी, अब उनको दुश्मनी है हमसे, दुनिया इसको कहते हैं' पंक्ति असल में 'अदावत' यानी दुश्मनी पर है, दावत यानी न्यौते पर नहीं - लेकिन मिलते-जुलते शब्दों का यह खेल शायरी में अक्सर देखने को मिलता है।
दावत शायरी किन मौकों पर शेयर की जाती है?
दावत शायरी अक्सर दोस्तों को किसी पार्टी या महफ़िल में बुलाने, या किसी आदत के नतीजों पर हल्के-फुल्के अंदाज़ में चेतावनी देने के लिए शेयर की जाती है।

Ek sher yahan tambaku ki aadat ko seedhe cancer ki dawat bataakar chetavni deta hai, to doosra dosti ke rishton mein chhupi adavat ko hi duniya ki asli dushmani bataata hai. Aage Aadat aur Aaj shayari bhi padhein.