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Chhath Puja Shayari

The sun god, honoured in verse.

Chhath Puja shayari here picture the sun god's chariot arriving with golden light and blessings for prosperity. See our Quotes page for more devotional lines.

सबके दिलों में हो सबके लिए प्यार,
आने वाल हर दिन लायें खुशियाँ अपार,
इस उम्मीद के साथ आओ भूल के सारे गम,
छठ पूजा को हम सब करें वेलकम.
Happy Chhath

Sabake dilon mein ho sabake lie pyaar,
Aane vaal har din laayen khushiyaan apaar,
Is ummeed ke saath aao bhool ke saare gam,
Chhath pooja ko ham sab karen velakam.
Happy chhhath

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छठ का आज है पावन त्यौहार,
सूरज की लाली माँ का हैं उपवास,
जल्दी से आओ अब करो न विचार,
छठ पूजा का खाने तुम प्रसाद.
हैप्पी छठ पूजा

Chhath ka aaj hai paavan tyauhaar,
Sooraj kee laalee maan ka hain upavaas,
Jaldee se aao ab karo na vichaar,
Chhath pooja ka khaane tum prasaad.
Haippee chhath pooja

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साथ घोड़ो के रथ पर सवार,
भगवान सूर्य आयें आपके द्वार,
किरणों से भरे आपका घर संसार,
छठ पूजा हो आपके लिए समृद्धि का त्यौहार.
हैप्पी छठ

Saath ghodo ke rath par savaar,
Bhagavaan soory aayen aapake dvaar,
Kiranon se bhare aapaka ghar sansaar,
Chhath pooja ho aapake lie samrddhi ka tyauhaar.
Haippee chhath

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आया है भगवान सूर्य का रथ,
आज है मन भावन सुनहरी छठ
और मिले आपको सुख सम्पति अपार,
छठ की शुभकामनाएं करें स्वीकार.
Happy Chhath Puja

Aaya hai bhagavaan soory ka rath,
Aaj hai man bhaavan sunaharee chhath
Aur mile aapako sukh sampati apaar,
Chhath kee shubhakaamanaen karen sveekaar.
Happy chhhath puj

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Tyohar Shayari

छठ पूजा आयें बनके उजाला,
खुल जाएँ आप की किस्मत का ताला,
हमेशा आप पर रहे मेहरबान ऊपर वाला,
यहीं दुआ करता है आपका ये चाहने वाला.
हैप्पी छठ

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Frequently Asked Questions

छठ पूजा 2026 में किस दिन मनाई जाएगी?
छठ पूजा 2026 में 15 नवंबर को मनाई जाएगी। यह पर्व किसी तय ग्रेगोरियन तारीख की बजाय हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि (संध्या अर्घ्य वाला दिन) पर आधारित है, इसलिए सौर कैलेंडर में इसकी तारीख हर साल आगे-पीछे होती रहती है। इस मौके की Wishes यहीं मिल जाएंगी।
छठ पूजा की शायरी में सूर्य देव के रथ और घोड़ों की कल्पना बार-बार क्यों दिखती है?
"साथ घोड़ो के रथ पर सवार, भगवान सूर्य आयें आपके द्वार" जैसी पंक्तियाँ सूर्य के रथ की पौराणिक छवि का सहारा लेकर उनके आगमन को साक्षात दृश्य बना देती हैं, फिर "किरणों से भरे आपका घर संसार" कहकर इसे पढ़ने वाले के लिए सीधा आशीर्वाद बना देती हैं।
छठ पूजा में असल में किसकी आराधना की जाती है?
छठ पूजा में मुख्य रूप से भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा होती है। छठी मैया को संतान-सुख और समृद्धि देने वाली देवी माना जाता है, जबकि उगते और डूबते सूर्य को साक्षात दिखाई देने वाले देवता के रूप में सीधे अर्घ्य दिया जाता है।
छठ की शायरी में उजाले और अंधकार मिटने की बात इतनी क्यों होती है?
चूंकि पूरा पर्व ही डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने पर टिका है, शायरी भी उसी भाव को पकड़ती है - जैसे "छठ पूजा आयें बनके उजाला, खुल जाएँ आप की किस्मत का ताला" में अंधकार मिटाकर भाग्य खुलने का बिंब इस्तेमाल हुआ है।
छठ पूजा चार दिनों तक क्यों चलती है, और हर दिन का क्या मतलब है?
चार दिन क्रमशः नहाय खाय (शुद्ध स्नान और सात्विक भोजन), खरना (दिनभर के उपवास के बाद शाम को गुड़ वाली खीर-रोटी का प्रसाद), संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को नदी या तालाब किनारे अर्घ्य) और उषा अर्घ्य (अगली सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य, जिसके बाद व्रत खुलता है) कहलाते हैं। हर दिन व्रती को अगले, ज़्यादा कठिन चरण के लिए तैयार करता है।
क्या छठ की शायरी सिर्फ भक्ति भाव की होती है, या इसमें बधाई संदेश भी होते हैं?
दोनों साथ चलते हैं - "छठ का आज है पावन त्यौहार, सूरज की लाली माँ का हैं उपवास" जैसी पंक्ति व्रत की गंभीरता को छूती है, फिर भी अंत में "हैप्पी छठ पूजा" जोड़कर इसे एक आम बधाई संदेश जैसा शेयर करने लायक बना देती है।
छठ के 36 घंटे के निर्जला व्रत में वास्तव में क्या होता है?
खरना की शाम प्रसाद खाने के बाद व्रती अगले दिन उषा अर्घ्य तक बिना पानी की एक बूंद के भी उपवास रखते हैं - यही करीब 36 घंटे का निर्जला व्रत है, जो छठ को हिंदू धर्म के सबसे कठोर व्रतों में गिने जाने की मुख्य वजह है।
छठ की शायरी लोग व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर इतनी ज़्यादा फॉरवर्ड क्यों करते हैं?
छोटी, तुकबंदी वाली और सीधे आशीर्वाद देने वाली ये पंक्तियाँ बिना ज़्यादा लिखे परिवार-दोस्तों तक त्योहार की भावना पहुंचाने का आसान ज़रिया बन जाती हैं। अलग अंदाज़ में यही भावना Quotes और Wishes पेज पर भी मिल जाएगी।
छठ पूजा में मूर्ति स्थापना या पुरोहित की भूमिका क्यों नहीं होती?
छठ में किसी मूर्ति की स्थापना नहीं होती - अर्घ्य सीधे आकाश में दिखाई दे रहे सूर्य को दिया जाता है, और पूरा अनुष्ठान व्रती व उसका परिवार खुद, बिना किसी पुरोहित की मध्यस्थता के, संपन्न करता है। यही इसे बड़े भारतीय त्योहारों में अलग और खासा पारिवारिक/व्यक्तिगत बनाता है।
छठ पूजा मुख्य रूप से कहाँ मनाई जाती है?
छठ बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) और नेपाल के तराई क्षेत्र का मूल पर्व है, लेकिन प्रवासी बिहारी-पूर्वांचली समुदाय की वजह से अब दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों और विदेशों में भी नदी-तालाब किनारे बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।
छठ पूजा का प्रसाद और सूप/दउरा में क्या रखा जाता है?
मुख्य प्रसाद ठेकुआ (गेहूं और गुड़ से बना पकवान) है, साथ ही चावल के लड्डू और केला, नारियल, गन्ना जैसे मौसमी फल बांस से बनी सूप और दउरा नाम की टोकरियों में सजाकर अर्घ्य के समय नदी किनारे ले जाए जाते हैं।
अर्घ्य के लिए नदी या तालाब किनारे जाना ज़रूरी क्यों माना जाता है?
अर्घ्य जल में खड़े होकर सूर्य को उसके साक्षात और जल-प्रतिबिंब, दोनों रूपों में अर्पित किया जाता है, इसलिए घाट का होना अनुष्ठान का अनिवार्य हिस्सा है - पर्व से पहले परिवार और स्थानीय समुदाय मिलकर घाटों की सफाई और सजावट करते हैं।
क्या छठ का व्रत सिर्फ महिलाएं ही रखती हैं?
नहीं - हालांकि व्रती के रूप में महिलाएं ज़्यादा दिखाई देती हैं, पुरुष भी उतनी ही निष्ठा से यह व्रत रखते हैं। परिवार का हर सदस्य किसी न किसी रूप में घाट की तैयारी, प्रसाद बनाने या अर्घ्य में शामिल होता है। छठ से जुड़ी और भावनाएं Shayari, Status और Quotes पेजों पर भी देखी जा सकती हैं।

Fasting, faith and gratitude to Surya Devta run through every couplet here. Browse Wishes for direct festival greetings too.