Chhath Puja Quotes, Wishes & Status
Four days of fasting and prayer to the rising and setting sun.
Chhath Puja is a four-day festival dedicated to the Sun God (Surya) and Chhathi Maiya, observed mainly in Bihar and the Purvanchal region of Uttar Pradesh, with devotees offering prayers on the banks of rivers and other water bodies at sunset and sunrise. Browse Quotes or send Wishes for the festival.
Frequently Asked Questions
छठ पूजा 2026 में किस दिन मनाई जाएगी?
छठ पूजा 2026 में 15 नवंबर को मनाई जाएगी। यह पर्व किसी तय ग्रेगोरियन तारीख की बजाय हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि (संध्या अर्घ्य वाला दिन) पर आधारित है, इसलिए सौर कैलेंडर में इसकी तारीख हर साल आगे-पीछे होती रहती है। इस मौके की Wishes यहीं मिल जाएंगी।
छठ पूजा में असल में किसकी आराधना की जाती है?
छठ पूजा में मुख्य रूप से भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा होती है। छठी मैया को संतान-सुख और समृद्धि देने वाली देवी माना जाता है, जबकि उगते और डूबते सूर्य को साक्षात दिखाई देने वाले देवता के रूप में सीधे अर्घ्य दिया जाता है।
छठ पूजा चार दिनों तक क्यों चलती है, और हर दिन का क्या मतलब है?
चार दिन क्रमशः नहाय खाय (शुद्ध स्नान और सात्विक भोजन), खरना (दिनभर के उपवास के बाद शाम को गुड़ वाली खीर-रोटी का प्रसाद), संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को नदी या तालाब किनारे अर्घ्य) और उषा अर्घ्य (अगली सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य, जिसके बाद व्रत खुलता है) कहलाते हैं। हर दिन व्रती को अगले, ज़्यादा कठिन चरण के लिए तैयार करता है।
छठ के 36 घंटे के निर्जला व्रत में वास्तव में क्या होता है?
खरना की शाम प्रसाद खाने के बाद व्रती अगले दिन उषा अर्घ्य तक बिना पानी की एक बूंद के भी उपवास रखते हैं - यही करीब 36 घंटे का निर्जला व्रत है, जो छठ को हिंदू धर्म के सबसे कठोर व्रतों में गिने जाने की मुख्य वजह है।
छठ पूजा में मूर्ति स्थापना या पुरोहित की भूमिका क्यों नहीं होती?
छठ में किसी मूर्ति की स्थापना नहीं होती - अर्घ्य सीधे आकाश में दिखाई दे रहे सूर्य को दिया जाता है, और पूरा अनुष्ठान व्रती व उसका परिवार खुद, बिना किसी पुरोहित की मध्यस्थता के, संपन्न करता है। यही इसे बड़े भारतीय त्योहारों में अलग और खासा पारिवारिक/व्यक्तिगत बनाता है।
छठ पूजा मुख्य रूप से कहाँ मनाई जाती है?
छठ बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) और नेपाल के तराई क्षेत्र का मूल पर्व है, लेकिन प्रवासी बिहारी-पूर्वांचली समुदाय की वजह से अब दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों और विदेशों में भी नदी-तालाब किनारे बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।
छठ पूजा का प्रसाद और सूप/दउरा में क्या रखा जाता है?
मुख्य प्रसाद ठेकुआ (गेहूं और गुड़ से बना पकवान) है, साथ ही चावल के लड्डू और केला, नारियल, गन्ना जैसे मौसमी फल बांस से बनी सूप और दउरा नाम की टोकरियों में सजाकर अर्घ्य के समय नदी किनारे ले जाए जाते हैं।
अर्घ्य के लिए नदी या तालाब किनारे जाना ज़रूरी क्यों माना जाता है?
अर्घ्य जल में खड़े होकर सूर्य को उसके साक्षात और जल-प्रतिबिंब, दोनों रूपों में अर्पित किया जाता है, इसलिए घाट का होना अनुष्ठान का अनिवार्य हिस्सा है - पर्व से पहले परिवार और स्थानीय समुदाय मिलकर घाटों की सफाई और सजावट करते हैं।
