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Chhath Puja Quotes

Quotes on devotion, discipline and gratitude for Chhath Puja.

Chhath Puja is one of the few festivals centered on worship of the Sun God, marked by fasting, rituals at the riverbank and deep discipline. These quotes speak to that devotion and gratitude for nature. Our Wishes collection has more to share.

छठ पूजा हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति में न आलस्य होता है, न विश्राम - सिर्फ समर्पण होता है।

Chhath Puja hamein sikhati hai ki sacchi bhakti mein na aalasya hota hai, na vishram - sirf samarpan hota hai.

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डूबते सूरज को अर्घ्य देना सिखाता है कि हार में भी आस्था नहीं छोड़नी चाहिए, कल फिर सूरज उगेगा।

Doobte suraj ko arghya dena sikhata hai ki haar mein bhi aastha nahi chhodni chahiye, kal fir suraj ugega.

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छठी मैया का व्रत प्रकृति, जल, सूर्य और परिवार - सबके प्रति कृतज्ञता का सबसे सुंदर उत्सव है।

Chhathi Maiya ka vrat prakriti, jal, surya aur parivar - sabke prati kritagyata ka sabse sundar utsav hai.

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खेत खलिहान धन और धान

खेत खलिहान धन और धान, यूं ही बनी रहे हमारी शान, छठ पूजा की शुभकामनाएं... छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं.

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Alex Quotes

सबके दिलों में हो सबके लिए प्यार,
आने वाल हर दिन लायें खुशियाँ अपार,
इस उम्मीद के साथ आओ भूल के सारे गम,
छठ पूजा को हम सब करें वेलकम.
Happy Chhath

Sabake dilon mein ho sabake lie pyaar,
Aane vaal har din laayen khushiyaan apaar,
Is ummeed ke saath aao bhool ke saare gam,
Chhath pooja ko ham sab karen velakam.
Happy chhhath

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Frequently Asked Questions

छठ पूजा 2026 में किस दिन मनाई जाएगी?
छठ पूजा 2026 में 15 नवंबर को मनाई जाएगी। यह पर्व किसी तय ग्रेगोरियन तारीख की बजाय हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि (संध्या अर्घ्य वाला दिन) पर आधारित है, इसलिए सौर कैलेंडर में इसकी तारीख हर साल आगे-पीछे होती रहती है। इस मौके की Wishes यहीं मिल जाएंगी।
छठ पूजा के कोट्स में "खेत खलिहान धन और धान" जैसी पंक्तियाँ किस भावना को दिखाती हैं?
"खेत खलिहान धन और धान, यूं ही बनी रहे हमारी शान" कृषि-प्रधान बिहार-पूर्वांचल की उस परंपरा को दिखाता है जहाँ छठ फसल कटने के बाद धरती और सूर्य के प्रति आभार जताने से भी जुड़ा माना जाता है - यहाँ समृद्धि की कामना सीधे खेत-खलिहान की भाषा में की गई है।
छठ पूजा में असल में किसकी आराधना की जाती है?
छठ पूजा में मुख्य रूप से भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा होती है। छठी मैया को संतान-सुख और समृद्धि देने वाली देवी माना जाता है, जबकि उगते और डूबते सूर्य को साक्षात दिखाई देने वाले देवता के रूप में सीधे अर्घ्य दिया जाता है।
छठ पूजा के कोट्स सामान्यतः किस तरह के विचार व्यक्त करते हैं?
ये कोट्स ज़्यादातर आभार, सामूहिक भलाई और सुख-समृद्धि की सीधी कामना पर टिके रहते हैं - जैसे "सबके दिलों में हो सबके लिए प्यार" वाली पंक्ति में निजी फ़ायदे की बजाय पूरे समाज की भलाई की भावना सामने आती है।
छठ पूजा चार दिनों तक क्यों चलती है, और हर दिन का क्या मतलब है?
चार दिन क्रमशः नहाय खाय (शुद्ध स्नान और सात्विक भोजन), खरना (दिनभर के उपवास के बाद शाम को गुड़ वाली खीर-रोटी का प्रसाद), संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को नदी या तालाब किनारे अर्घ्य) और उषा अर्घ्य (अगली सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य, जिसके बाद व्रत खुलता है) कहलाते हैं। हर दिन व्रती को अगले, ज़्यादा कठिन चरण के लिए तैयार करता है।
लोग छठ पूजा पर कोट्स शेयर करना क्यों पसंद करते हैं?
कोट्स एक स्पष्ट, सुविचारित भाव को थोड़े शब्दों में कह देते हैं, जिससे इन्हें बड़े ग्रुप या ऑफिस-परिचितों तक भेजना आसान और उपयुक्त लगता है, वहीं ज़्यादा व्यक्तिगत भावना के लिए लोग शायरी या विश की ओर जाते हैं।
छठ के 36 घंटे के निर्जला व्रत में वास्तव में क्या होता है?
खरना की शाम प्रसाद खाने के बाद व्रती अगले दिन उषा अर्घ्य तक बिना पानी की एक बूंद के भी उपवास रखते हैं - यही करीब 36 घंटे का निर्जला व्रत है, जो छठ को हिंदू धर्म के सबसे कठोर व्रतों में गिने जाने की मुख्य वजह है।
छठ पूजा के कोट्स और शायरी/विश में मुख्य फ़र्क़ क्या है?
कोट्स आमतौर पर सीधी शुभकामना और आभार की भाषा में लिखे जाते हैं, जबकि Shayari में सूर्य-रथ जैसी काव्यात्मक कल्पना ज़्यादा होती है और Wishes किसी खास व्यक्ति को सीधे संबोधित बधाई के लिए होते हैं।
छठ पूजा में मूर्ति स्थापना या पुरोहित की भूमिका क्यों नहीं होती?
छठ में किसी मूर्ति की स्थापना नहीं होती - अर्घ्य सीधे आकाश में दिखाई दे रहे सूर्य को दिया जाता है, और पूरा अनुष्ठान व्रती व उसका परिवार खुद, बिना किसी पुरोहित की मध्यस्थता के, संपन्न करता है। यही इसे बड़े भारतीय त्योहारों में अलग और खासा पारिवारिक/व्यक्तिगत बनाता है।
छठ पूजा मुख्य रूप से कहाँ मनाई जाती है?
छठ बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) और नेपाल के तराई क्षेत्र का मूल पर्व है, लेकिन प्रवासी बिहारी-पूर्वांचली समुदाय की वजह से अब दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों और विदेशों में भी नदी-तालाब किनारे बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।
छठ पूजा का प्रसाद और सूप/दउरा में क्या रखा जाता है?
मुख्य प्रसाद ठेकुआ (गेहूं और गुड़ से बना पकवान) है, साथ ही चावल के लड्डू और केला, नारियल, गन्ना जैसे मौसमी फल बांस से बनी सूप और दउरा नाम की टोकरियों में सजाकर अर्घ्य के समय नदी किनारे ले जाए जाते हैं।
अर्घ्य के लिए नदी या तालाब किनारे जाना ज़रूरी क्यों माना जाता है?
अर्घ्य जल में खड़े होकर सूर्य को उसके साक्षात और जल-प्रतिबिंब, दोनों रूपों में अर्पित किया जाता है, इसलिए घाट का होना अनुष्ठान का अनिवार्य हिस्सा है - पर्व से पहले परिवार और स्थानीय समुदाय मिलकर घाटों की सफाई और सजावट करते हैं।
क्या छठ का व्रत सिर्फ महिलाएं ही रखती हैं?
नहीं - हालांकि व्रती के रूप में महिलाएं ज़्यादा दिखाई देती हैं, पुरुष भी उतनी ही निष्ठा से यह व्रत रखते हैं। परिवार का हर सदस्य किसी न किसी रूप में घाट की तैयारी, प्रसाद बनाने या अर्घ्य में शामिल होता है। छठ से जुड़ी और भावनाएं Shayari, Status और Quotes पेजों पर भी देखी जा सकती हैं।

The festival's rigor and sincerity come through in how people write about it, and these lines try to match that spirit. For shorter lines to post, see our Status collection.