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Ahinsa Anmol Vachan

सत्य को भगवान और अहिंसा को उसका साधन बताता गांधी का वचन।

सत्य को ही सबसे बड़ी शक्ति और भगवान का रूप मानते हुए, अहिंसा को उस सत्य तक पहुंचने के इकलौते ज़रिए के रूप में यह अनमोल वचन प्रस्तुत करता है। महात्मा गांधी के जीवन-दर्शन की यह बुनियाद रही है।

मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है,
सत्य मेरा भगवान है, अहिंसा उसे पाने का साधन...

Mera dharm saty aur ahinsa par aadhaarit hai,
Satya mera bhagavaan hai, ahinsa use paane ka saadhan...

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Frequently Asked Questions

यह वचन अहिंसा को किस तरह परिभाषित करता है?
यह वचन अहिंसा को सत्य तक पहुंचने का साधन बताता है, न कि खुद में साध्य। वक्ता के अनुसार उनका पूरा धर्म ही सत्य और अहिंसा की नींव पर टिका है।
इस वचन में सत्य और अहिंसा का क्या रिश्ता बताया गया है?
वचन के मुताबिक सत्य को ईश्वर माना गया है, जबकि अहिंसा उस सत्य तक पहुंचने का मार्ग है। यानी अहिंसा साधन है और सत्य साध्य।
यह मान्यता किन मूल्यों पर टिकी है?
यह गहरा नाता Dharm और Satya जैसे मूल्यों से जुड़ता है, जो वक्ता के व्यक्तिगत विश्वास का आधार रहे हैं।

धर्म की यह परिभाषा किसी कर्मकांड से नहीं बल्कि सच्चाई और अहिंसा के आचरण से जुड़ी है। ऐसे मूल्यों पर टिकी सोच सकारात्मक वचनों में भी बार-बार उभरती है।