कांच के टुकड़ो की तरह बिखर गयी है ज़िन्दगी
Popular Shayari Topics for You.
कांच के टुकड़ो की तरह बिखर गयी है ज़िन्दगी,
हाथ कटने के डर से किसी ने हमे समेटा भी नहीं ..!!
feelthewords.com
कांच के टुकड़ो की तरह बिखर गयी है ज़िन्दगी,
हाथ कटने के डर से किसी ने हमे समेटा भी नहीं ..!!
Kaanch ke tukado kee tarah bikhar gayee hai zindagee,
Haath katane ke dar se kisee ne hame sameta bhee nahin ..!!
