ज़माने भर की निगाहों में
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ज़माने भर की निगाहों में
जो खुदा सा लगे,
वो अजनबी है मगर
मुझ को आशना सा लगे,
न जाने कब मेरी
दुनिया में मुस्कुराएगा,
वो शख्स जो ख्वाबों
में भी खफा सा लगे।
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ज़माने भर की निगाहों में
जो खुदा सा लगे,
वो अजनबी है मगर
मुझ को आशना सा लगे,
न जाने कब मेरी
दुनिया में मुस्कुराएगा,
वो शख्स जो ख्वाबों
में भी खफा सा लगे।
Zamaane Bhar Ki Nigahon Mein
Jo Khuda Sa Lage,
Woh Ajnabi Hai Magar
Mujhko Aashna Sa Lage,
Na Jaane Kab Meri
Duniya Mein Muskarayega,
Wo Shakhs Jo Khwabon
Mein Bhi Khafa Sa Lage!
