वक़्त हर ज़ख़्म का मरहम तो नहीं बन सकता
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वक़्त हर ज़ख़्म का मरहम तो नहीं बन सकता
दर्द कुछ होते हैं ता-उम्र रुलाने वाले।
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वक़्त हर ज़ख़्म का मरहम तो नहीं बन सकता
दर्द कुछ होते हैं ता-उम्र रुलाने वाले।
Waqt Har Zakhm Ka Marham Ton Ban Nahi Sakta,
Dard Kuchh Hote Hain Ta-Umr Rulane Wale.
