मंजिल तो हांसिल कर ही लेंगे कहीं किसी रोज
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मंजिल तो हांसिल कर ही लेंगे कहीं किसी रोज,.
ठोकरें ज़हर तो नहीं जो खा के मर जाएँ.
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मंजिल तो हांसिल कर ही लेंगे कहीं किसी रोज,.
ठोकरें ज़हर तो नहीं जो खा के मर जाएँ.
Manjil to haansil kar hee lenge kaheen kisee roj,.
Thokaren zahar to nahin jo kha ke mar jaen.
