बाहर से तो पहले की तरह अब भी हूँ
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बाहर से तो पहले की तरह अब भी हूँ,
लेकिन मेरे अंदर कोई ग़म टूट रहा है.
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बाहर से तो पहले की तरह अब भी हूँ,
लेकिन मेरे अंदर कोई ग़म टूट रहा है.
Baahar se to pahale kee tarah ab bhee hoon,
Lekin mere andar koee gam toot raha hai.
Today's Shayari
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