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बात ऊँची थी मगर बात जरा कम आंकी,
मेरे जज्बात की औकात जरा कम आंकी,
वो फ़रिश्ता कहकर मुझे जलील करता रहा,
मैं इंसान हूँ मेरी जात जरा कम आंकी।
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बात ऊँची थी मगर बात जरा कम आंकी,
मेरे जज्बात की औकात जरा कम आंकी,
वो फ़रिश्ता कहकर मुझे जलील करता रहा,
मैं इंसान हूँ मेरी जात जरा कम आंकी।

Baat Unchi Thi Magar Baat Jara Kaam Aanki,
Mere Jazbaat Ki Aukaat Jara Kam Aanki,
Wo Farishta Keh Kar Mujhe Jaleel Karta Raha,
Main Insaan Hoon, Meri Jaat Jara Kam Aanki.

Hurt Shayari Meri Shayari

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