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इंतज़ार की गज़लें

राह तकते दिल की भाषा

किसी के लौट आने की उम्मीद में गुज़रती रातें और हर आहट पर ठिठकता दिल - इंतज़ार की गज़लें इसी बेचैनी को अपनी भाषा देती हैं। इसी विषय पर हमारी Shayari भी पढ़ें।

10

बिस्तर का वो ख़ाली हिस्सा अब भी चुभता है,
जुदाई का एहसास हर रात सालता है।

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9

स्टेशन पे वो आख़िरी अलविदा याद आता है,
ट्रेन की सीटी आज भी दिल को रुला जाता है।

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8

तेरे जाने से जैसे आधा वजूद चला गया,
जो बचा है वो बस इक साया रह गया।

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7

लिखे थे कुछ ख़त मगर जवाब नहीं आया,
जुदाई ने हर रिश्ते को ख़ामोश बनाया।

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Dard Ghazals

6

हम दोनों की राहें अब अलग हो गई हैं,
यादें ही बस अब इस सफ़र की निशानी हैं।

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5

कुछ वादे अधूरे छोड़ कर तू चला गया,
जुदाई का ये ज़ख़्म दिल में रहा अनछुआ।

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4

तेरे जाने के बाद घर भी ख़ामोश हो गया है,
हर कोना अब बस यादों का अफ़साना है।

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3

हर शाम खिड़की पे आँखें बिछा के बैठा हूँ,
तेरे आने की उम्मीद में पलकें थका के बैठा हूँ।

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2

घड़ी की सुइयाँ भी आज धीरे चलती लगती हैं,
तेरे इंतज़ार में ये रातें लंबी लगती हैं।

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Judai Ghazals

1

हर आहट पे लगता है शायद तू आया है,
दिल को हर बार यही धोखा भाया है।

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यहाँ हर शेर उस चुप्पी को समझता है जो किसी का इंतज़ार करते वक़्त दिल में बसती है, बिना किसी बड़े दावे के। जो कोई भी इस एहसास से गुज़र रहा है, उसे यह संग्रह अपनी ही कहानी जैसा लगेगा।