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हर शाम खिड़की पे आँखें बिछा के बैठा हूँ,
तेरे आने की उम्मीद में पलकें थका के बैठा हूँ।
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हर शाम खिड़की पे आँखें बिछा के बैठा हूँ,
तेरे आने की उम्मीद में पलकें थका के बैठा हूँ।

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