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दर्द भरी गज़लें

जब लफ़्ज़ों में ढल जाए दर्द

दर्द भरी गज़लें उस ख़ामोश तकलीफ़ को शब्द देती हैं जो दिल में तो रहती है पर ज़ुबान तक नहीं आ पाती। किसी अपने के लौटने का इंतज़ार करने वालों को हमारी Intezaar गज़लें भी अपनी सी लगेंगी।

ख़ामोश पड़ा फ़ोन भी अब इक कहानी कहता है,
तेरी कॉल का इंतज़ार दिल अब भी सहता है।

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दर्द ने मुझे शायर बना दिया है इस क़दर,
हर ग़म अब इक नज़्म बनके निकलता है मुझसे।

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Popular Ghazals Topics for You.

तेरे जाने के बाद घर भी ख़ामोश हो गया है,
हर कोना अब बस यादों का अफ़साना है।

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स्टेशन की बेंच पे अकेला बैठा रहता हूँ,
हर ट्रेन के साथ उम्मीद से उठता रहता हूँ।

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Intezaar Ghazals

रात की तन्हाई में बस ख़याल ही साथ रहते हैं,
नींद भी अब ग़म के क़िस्से सुनकर रूठ जाती है।

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दिल रोता है मगर आँसू नहीं निकलते,
दर्द इतना गहरा है कि अल्फ़ाज़ भी नहीं निकलते।

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कुछ वादे अधूरे छोड़ कर तू चला गया,
जुदाई का ये ज़ख़्म दिल में रहा अनछुआ।

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चाँद गवाह है मेरी हर रात की प्रतीक्षा का,
तेरे इंतज़ार में बीता हर पल है सबूत वफ़ा का।

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टूटे हुए आइने में भी अक्स अधूरा दिखता है,
ग़म का साया अब हर मंज़र में बसा रहता है।

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Judai Ghazals

वो ख़ाली कुर्सी अब भी मुझे ताकती रहती है,
तन्हाई की कहानी हर शाम सुनाती रहती है।

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मुस्कुराहट के पीछे आँसू छुपा लिए हैं हमने,
ग़म को भी इक अदा बना लिया है हमने।

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बारिश तो आती है मगर अब वो बात नहीं रही,
तेरे बिना हर मौसम में बस उदासी रहती है।

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पुराने ख़त की स्याही भी अब धुंधली पड़ गई है,
जैसे वक़्त के साथ हर याद धुंधली पड़ गई है।

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वक़्त भी जिस ज़ख़्म को भर नहीं पाया,
वो दर्द आज तक दिल में समाया।

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Sad Ghazals

अंदर ही अंदर इक चीख़ दबी रहती है,
दर्द की ये भाषा सबको कहाँ समझ आती है।

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चेहरे पे मुस्कान दर्द को छुपाने के लिए है,
ये अदा भी हमने सीखी ज़माने के लिए है।

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हर साँस में अब इक हल्का सा दर्द रहता है,
फिर भी ज़िंदगी का सफ़र जारी रहता है।

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पुराने ज़ख़्म फिर हरे हो जाते हैं कभी कभी,
वक़्त की मरहम भी कम पड़ जाती है कभी कभी।

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बिस्तर का वो ख़ाली हिस्सा अब भी चुभता है,
जुदाई का एहसास हर रात सालता है।

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Dard Ghazals In Hindi

स्टेशन पे वो आख़िरी अलविदा याद आता है,
ट्रेन की सीटी आज भी दिल को रुला जाता है।

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Frequently Asked Questions

What kind of ghazals are collected under Dard?
These are couplets about the ache of waiting — a moon standing witness to sleepless nights, a promise to return that's never kept, and a heart still expecting the postman's knock. The pain here is the quiet, ongoing kind rather than a single dramatic heartbreak.
Why do people look specifically for Dard ghazals?
"दर्द" searches usually aren't for sudden grief but for something naming a long, low-grade ache readers recognize in themselves — related waiting-specific pain is at Intezaar and separation-specific pain at Judai.
Is there a detail that stands out in these couplets?
The line about still expecting the postman's knock ("डाकिए का इंतज़ार आज भी रहता है मुझे") ages the pain to a pre-digital, letter-writing kind of longing. Readers drawn to that mood also browse Sad.

हर आहट पर उम्मीद जागना और फिर टूट जाना, यही एहसास इन गज़लों की जान है। बिछड़न के इसी दर्द को और गहराई से जानने के लिए Judai और Sad गज़लें भी पढ़ें।