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दर्द भरी गज़लें

जब लफ़्ज़ों में ढल जाए दर्द

दर्द भरी गज़लें उस ख़ामोश तकलीफ़ को शब्द देती हैं जो दिल में तो रहती है पर ज़ुबान तक नहीं आ पाती। किसी अपने के लौटने का इंतज़ार करने वालों को हमारी Intezaar गज़लें भी अपनी सी लगेंगी।

मुरझाया हुआ फूल भी कभी ख़ुशबू बिखेरता था,
दिल भी मेरा कभी यूँ ही महकता रहता था।

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तन्हाई सबसे गहरा ज़ख़्म होती है शायद,
जो भीड़ में भी अकेला महसूस कराती है।

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Popular Ghazals Topics for You.

जुदा हुए हैं मगर मिलने की उम्मीद अभी बाक़ी है,
दिल कहता है ये दूरी बस इक रात बाक़ी है।

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मौसम बदलते गए मगर मेरा इंतज़ार न बदला,
तेरी याद का दीया दिल में आज भी है जला।

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Intezaar Ghazals

ख़ामोश पड़ा फ़ोन भी अब इक कहानी कहता है,
तेरी कॉल का इंतज़ार दिल अब भी सहता है।

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दर्द ने मुझे शायर बना दिया है इस क़दर,
हर ग़म अब इक नज़्म बनके निकलता है मुझसे।

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तेरे जाने के बाद घर भी ख़ामोश हो गया है,
हर कोना अब बस यादों का अफ़साना है।

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स्टेशन की बेंच पे अकेला बैठा रहता हूँ,
हर ट्रेन के साथ उम्मीद से उठता रहता हूँ।

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रात की तन्हाई में बस ख़याल ही साथ रहते हैं,
नींद भी अब ग़म के क़िस्से सुनकर रूठ जाती है।

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Judai Ghazals

दिल रोता है मगर आँसू नहीं निकलते,
दर्द इतना गहरा है कि अल्फ़ाज़ भी नहीं निकलते।

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कुछ वादे अधूरे छोड़ कर तू चला गया,
जुदाई का ये ज़ख़्म दिल में रहा अनछुआ।

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चाँद गवाह है मेरी हर रात की प्रतीक्षा का,
तेरे इंतज़ार में बीता हर पल है सबूत वफ़ा का।

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टूटे हुए आइने में भी अक्स अधूरा दिखता है,
ग़म का साया अब हर मंज़र में बसा रहता है।

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वो ख़ाली कुर्सी अब भी मुझे ताकती रहती है,
तन्हाई की कहानी हर शाम सुनाती रहती है।

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Sad Ghazals

मुस्कुराहट के पीछे आँसू छुपा लिए हैं हमने,
ग़म को भी इक अदा बना लिया है हमने।

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बारिश तो आती है मगर अब वो बात नहीं रही,
तेरे बिना हर मौसम में बस उदासी रहती है।

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पुराने ख़त की स्याही भी अब धुंधली पड़ गई है,
जैसे वक़्त के साथ हर याद धुंधली पड़ गई है।

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वक़्त भी जिस ज़ख़्म को भर नहीं पाया,
वो दर्द आज तक दिल में समाया।

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अंदर ही अंदर इक चीख़ दबी रहती है,
दर्द की ये भाषा सबको कहाँ समझ आती है।

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Dard Ghazals In Hindi

चेहरे पे मुस्कान दर्द को छुपाने के लिए है,
ये अदा भी हमने सीखी ज़माने के लिए है।

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Frequently Asked Questions

What kind of ghazals are collected under Dard?
These are couplets about the ache of waiting — a moon standing witness to sleepless nights, a promise to return that's never kept, and a heart still expecting the postman's knock. The pain here is the quiet, ongoing kind rather than a single dramatic heartbreak.
Why do people look specifically for Dard ghazals?
"दर्द" searches usually aren't for sudden grief but for something naming a long, low-grade ache readers recognize in themselves — related waiting-specific pain is at Intezaar and separation-specific pain at Judai.
Is there a detail that stands out in these couplets?
The line about still expecting the postman's knock ("डाकिए का इंतज़ार आज भी रहता है मुझे") ages the pain to a pre-digital, letter-writing kind of longing. Readers drawn to that mood also browse Sad.

हर आहट पर उम्मीद जागना और फिर टूट जाना, यही एहसास इन गज़लों की जान है। बिछड़न के इसी दर्द को और गहराई से जानने के लिए Judai और Sad गज़लें भी पढ़ें।