दर्द भरी गज़लें
जब लफ़्ज़ों में ढल जाए दर्द
दर्द भरी गज़लें उस ख़ामोश तकलीफ़ को शब्द देती हैं जो दिल में तो रहती है पर ज़ुबान तक नहीं आ पाती। किसी अपने के लौटने का इंतज़ार करने वालों को हमारी Intezaar गज़लें भी अपनी सी लगेंगी।
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Intezaar Ghazals
6पुराने ख़त की स्याही भी अब धुंधली पड़ गई है,
जैसे वक़्त के साथ हर याद धुंधली पड़ गई है।
रात की तन्हाई में बस ख़याल ही साथ रहते हैं,
नींद भी अब ग़म के क़िस्से सुनकर रूठ जाती है।
