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दर्द भरी गज़लें

जब लफ़्ज़ों में ढल जाए दर्द

दर्द भरी गज़लें उस ख़ामोश तकलीफ़ को शब्द देती हैं जो दिल में तो रहती है पर ज़ुबान तक नहीं आ पाती। किसी अपने के लौटने का इंतज़ार करने वालों को हमारी Intezaar गज़लें भी अपनी सी लगेंगी।

10

टूटे हुए आइने में भी अक्स अधूरा दिखता है,
ग़म का साया अब हर मंज़र में बसा रहता है।

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9

वो ख़ाली कुर्सी अब भी मुझे ताकती रहती है,
तन्हाई की कहानी हर शाम सुनाती रहती है।

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8

मुस्कुराहट के पीछे आँसू छुपा लिए हैं हमने,
ग़म को भी इक अदा बना लिया है हमने।

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7

बारिश तो आती है मगर अब वो बात नहीं रही,
तेरे बिना हर मौसम में बस उदासी रहती है।

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Intezaar Ghazals

6

पुराने ख़त की स्याही भी अब धुंधली पड़ गई है,
जैसे वक़्त के साथ हर याद धुंधली पड़ गई है।

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5

रात की तन्हाई में बस ख़याल ही साथ रहते हैं,
नींद भी अब ग़म के क़िस्से सुनकर रूठ जाती है।

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4

ख़ामोश पड़ा फ़ोन भी अब इक कहानी कहता है,
तेरी कॉल का इंतज़ार दिल अब भी सहता है।

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3

वक़्त भी जिस ज़ख़्म को भर नहीं पाया,
वो दर्द आज तक दिल में समाया।

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2

अंदर ही अंदर इक चीख़ दबी रहती है,
दर्द की ये भाषा सबको कहाँ समझ आती है।

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Judai Ghazals

1

चेहरे पे मुस्कान दर्द को छुपाने के लिए है,
ये अदा भी हमने सीखी ज़माने के लिए है।

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हर आहट पर उम्मीद जागना और फिर टूट जाना, यही एहसास इन गज़लों की जान है। बिछड़न के इसी दर्द को और गहराई से जानने के लिए Judai और Sad गज़लें भी पढ़ें।