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Najdikiya Shayari

Kabhi paas hoke bhi door, kabhi door hoke bhi paas.

Najdikiya shayari un rishton ki baat karti hai jinme fasle bhi ho aur nazdikiyan bhi, kabhi bina kahe samajh aane wali, kabhi door hoke hi mehsoos hone wali. Isi mizaaj mein Door shayari bhi padhein.

Najdikiya Shayari - Fasle Aur Nazdikiyon Ke Sher

कुछ फासले ऐसे भी होते हैं जनाब.....
जो तय तो नहीं होते मगर, नजदीकियां कमाल की रखते हैं...!!

Kuchh phaasale aise bhee hote hain janaab.....
Jo tay to nahin hote magar, najadeekiyaan kamaal kee rakhate hain...!!

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शायद वो नाराज है बदले जो अंदाज हैं

शायद वो नाराज है, बदले जो अंदाज हैं...
कल तक थी नजदीकियां मगर फासले आज हैं...!!

Shaayad vo naaraaj hai, badale jo andaaj hain...
Kal tak thee najadeekiyaan magar phaasale aaj hain...!!

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रंजिशें जब कर ही ली तो गुफ्तगू किस बात की...
खुश हैं जब हम फासलों से तो नज़दीकियां किस बात की...!!

Ranjishen jab kar hee lee to guphtagoo kis baat kee...
Khush hain jab ham phaasalon se to nazadeekiyaan kis baat kee...!!

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समझने के लिये,नजदीकियाँ ही काफी नही...
दूरियाँ भी बयाँ कर देती है,बहुत सी खूबियाँ...!!

Samajhane ke liye,najadeekiyaan hee kaaphee nahee...
Dooriyaan bhee bayaan kar detee hai,bahut see khoobiyaan...!!

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2 Line Shayari

दूरीयो से ही एहसास होता है कि
नजदीकियां कितनी खास होती है...

Dooreeyo se hee ehasaas hota hai ki
Najadeekiyaan kitanee khaas hotee hai...

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रखा करो नजदीकियां जिंदगी का कुछ भरोसा नहीं

रखा करो नजदीकियां, जिंदगी का कुछ भरोसा नहीं,
फिर मत कहना चले भी गए और बताया भी नहीं !!

Rakha karo najadeekiyaan, jindagee ka kuchh bharosa nahin,
Phir mat kahana chale bhee gae aur bataaya bhee nahin !!

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Frequently Asked Questions

क्या नजदीकियों को हमेशा नाप-तौल कर परिभाषित किया जा सकता है?
नहीं, एक शायरी के अनुसार "कुछ फासले ऐसे भी होते हैं जनाब..... जो तय तो नहीं होते मगर, नजदीकियां कमाल की रखते हैं", यानी कुछ रिश्तों की फासले जैसी अनकही चीजें भी बिना नाप-तौल के गहरी नजदीकी रखती हैं।
रिश्ते में नाराज़गी नजदीकियों को कैसे बदल देती है?
एक शायरी में लिखा है "शायद वो नाराज है, बदले जो अंदाज हैं... कल तक थी नजदीकियां मगर फासले आज हैं", यह दिखाता है कि किसी के व्यवहार में बदलाव आने पर बीती नजदीकियां आज दूरियों में बदल सकती हैं।
क्या दूरियां किसी रिश्ते में जानबूझकर अपनाई जा सकती हैं?
हां, एक शायरी में कहा गया है "रंजिशें जब कर ही ली तो गुफ्तगू किस बात की... खुश हैं जब हम फासलों से तो नज़दीकियां किस बात की", यानी नाराज़गी के बाद इंसान दूरी में ही सुकून तलाश सकता है।
क्या सिर्फ नजदीकियां किसी को पूरी तरह समझने के लिए काफी हैं?
नहीं, "समझने के लिये, नजदीकियाँ ही काफी नही... दूरियाँ भी बयाँ कर देती है, बहुत सी खूबियाँ" के अनुसार दूरियां भी किसी इंसान की कई खूबियां उजागर करती हैं, जो सिर्फ नजदीकी में पता नहीं चलतीं।
यह नजदीकियां शायरी कलेक्शन किस थीम पर केंद्रित है?
यह कलेक्शन नजदीकी और दूरी के बीच के जटिल रिश्ते पर केंद्रित है, जहां शायरियां बताती हैं कि नापी न जा सकने वाली नजदीकियां और अनकहे फासले दोनों ही किसी रिश्ते का हिस्सा होते हैं।

Kai lines yahan dooriyon ko rishte ki khoobi batati hain, jo najdikiyon se bhi zyada kuch keh jaati hain. Aur milega Dooriyaan aur Bharosa shayari mein.