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Mareej Shayari

Doctor aur mareej ka rishta izzat se hi poora hota hai.

Mareej shayari mein doctor aur mareej ke beech ek barabar izzat wale rishte ki umeed dikhti hai, jitna mareej doctor ko maane utna hi doctor bhi mareej ko samjhe. Isi soch mein Bimar shayari bhi padhein.

Mareej Shayari - Rishton Aur Zindagi Ke Sher

मरीज जितना डॉक्टर की इज्जत करते है,
डॉक्टर को भी मरीज का उतना ही इज्जत करना चाहिए।

Mareej jitana doktar kee ijjat karate hai,
Doktar ko bhee mareej ka utana hee ijjat karana chaahie.

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खुदा का काम है यूँ तो मरीजों को शिफा* देना
मुनासिब हो तो इक दिन हाथों से अपने दवा देना

*शिफा = रोगमुक्ति

Khuda ka kaam hai yun marizon ko shifa dena
Munasib ho to ik din hathon se apne dawa dena

Aziz Lakhnavi

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कुछ तुमको भी अज़ीज़ है अपने सभी उसूल

कुछ तुमको भी अज़ीज़ है अपने सभी उसूल...
कुछ हम भी इत्तेफ़ाक से जिद्द के मरीज है...

Kuchh tumako bhee azeez hai apane sabhee usool...
Kuchh ham bhee ittefaak se jidd ke mareej hai...

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Frequently Asked Questions

"मरीज" संग्रह में डॉक्टर और मरीज के रिश्ते पर क्या शायरी है?
एक सारगर्भित शायरी आपसी सम्मान की बात करती है - "मरीज जितना डॉक्टर की इज्जत करते है, डॉक्टर को भी मरीज का उतना ही इज्जत करना चाहिए।" यह दिखाती है कि इलाज का रिश्ता एकतरफा नहीं, बल्कि दोनों तरफ से बराबर सम्मान माँगता है। बीमारी और सेहत से जुड़ी शायरियों के लिए Bimar देखें।
संग्रह में खुदा और दवा को लेकर कोई भावुक शायरी है?
हाँ, एक खूबसूरत शायरी कहती है - "खुदा का काम है यूँ तो मरीजों को शिफा (रोगमुक्ति) देना, मुनासिब हो तो इक दिन हाथों से अपने दवा देना" यहाँ प्रेमी अपने प्रिय से चुटीले अंदाज़ में कहता है कि भले शिफा देना खुदा का काम हो, पर वह खुद अपने हाथों से एक दिन दवा दे दे। दवा-इलाज से जुड़ी शायरियों के लिए Dava पढ़ें।
"मरीज" शब्द का इस्तेमाल किसी और भाव के लिए भी हुआ है क्या?
हाँ, एक शायरी में "मरीज" शब्द जिद्द के लिए रूपक की तरह इस्तेमाल हुआ है - "कुछ तुमको भी अज़ीज़ है अपने सभी उसूल... कुछ हम भी इत्तेफ़ाक से जिद्द के मरीज है..." यहाँ दोनों तरफ की अपनी-अपनी जिद और उसूलों की बात कही गई है, मानो जिद्द भी एक बीमारी हो। अपनों की जिद और स्वभाव से जुड़ी शायरियों के लिए Apne देखें।
इस संग्रह से "मरीज" शब्द के कितने रूप उभर कर सामने आते हैं?
यह संग्रह "मरीज" को शाब्दिक अर्थ यानी डॉक्टर के मरीज और रूपक यानी जिद्द के मरीज दोनों रूपों में इस्तेमाल करता है, जो इसे दिलचस्प बनाता है। बीमारी से जुड़े अन्य पहलुओं के लिए Bimari भी पढ़ सकते हैं।

Ek sher yahan khuda se rogmukti maangne walon ke liye hathon se dawa dene jaisi dua ki baat karta hai, to doosra khud ko apni zid ka mareej maankar ittefaq se ye kabool karta hai. Aage Apne aur Bimari shayari bhi padhein.