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Labor Day Shayari

Mehnat ka pasina hi sabse badi shaan hai.

Labor Day shayari mein mazdooron ki din bhar ki mehnat aur unke haq ki baat hoti hai, jinhe aksar wahi suvidhayein nahi milti jo doosron ko milti hain. Isi jazbe mein Quotes bhi padhein.

लोगों ने आराम किया और छुट्टी पूरी की
यकुम मई को भी मज़दूरों ने मज़दूरी की !!

Logon ne aaraam kiya aur chhuttee pooree kee
Yakum MAy ko bhi mazadooron ne mazadooree kee !!

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मजदूरों के भी अधिकार हैं,
उनका भी घर परिवार है।

Majadooron ke bhi adhikaar hain,
Unka bhi ghar parivaar hai !!

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किसी को क्या बताये कि कितने मजबूर हैं हम
बस इतना समझ लीजिये कि मजदूर हैं हम

मज़दूर दिवस की शुभकामनायें !!

Kisee ko kya bataaye ki kitane majaboor hain ham
Bas itana samajh leejiye ki majadoor hain ham

Mazadoor divas kee shubhakaamanaayen !!

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देखो काम कर रहे हम दिन भर,
जीवन है हमारा व्यस्त,
फिर भी ना जाने क्यों, दूसरो की तरह
हमको सुविधाएं ना मिल रही समस्त।

Dekho kaam kar rahe ham din bhar,
Jeevan hai hamaara vyast,
Phir bhee na jaane kyon, doosaro kee tarah
Hamako suvidhaen na mil rahee samast.

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International Workers' Day Shayari

मैं मजदूर हूँ मजबूर नहीं,
यह कहने में मुझे शर्म नहीं !!
अपने पसीने की खाता हूँ,
मैं मिटटी को सोना बनाता हूँ !!

Main majadoor hoon majaboor nahin,
Yah kahane mein mujhe sharm nahin !!
Apne paseene ki khaata hoon,
Main Mitti ko Sona banaata hoon !!

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Frequently Asked Questions

दिन भर व्यस्त काम करने के बावजूद दूसरों जैसी सुविधाएं न मिलने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"देखो काम कर रहे हम दिन भर, जीवन है हमारा व्यस्त, फिर भी ना जाने क्यों, दूसरो की तरह हमको सुविधाएं ना मिल रही समस्त।" — यह शायरी दिन भर काम में व्यस्त रहने के बावजूद दूसरों की तरह सुविधाएं न मिल पाने की मेहनतकश की पीड़ा बताती है।
1 मई (यकुम मई) को भी लोगों के छुट्टी मनाने के बीच मज़दूरों के मज़दूरी करते रहने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"लोगों ने आराम किया और छुट्टी पूरी की यकुम मई को भी मज़दूरों ने मज़दूरी की !!" — यह शायरी मज़दूर दिवस (1 मई) पर भी लोगों के आराम करने के बीच मज़दूरों के मज़दूरी करते रहने की विडंबना बताती है।
मज़दूरों के भी अधिकार और अपना घर-परिवार होने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"मजदूरों के भी अधिकार हैं, उनका भी घर परिवार है।" — यह शायरी सीधे शब्दों में कहती है कि मज़दूरों के भी अधिकार हैं और उनका भी अपना घर-परिवार है।
मज़दूर होने पर शर्म न करते हुए अपने पसीने से मिट्टी को सोना बनाने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"मैं मजदूर हूँ मजबूर नहीं, यह कहने में मुझे शर्म नहीं !! अपने पसीने की खाता हूँ, मैं मिटटी को सोना बनाता हूँ !!" — यह शायरी गर्व से कहती है कि मज़दूर होना मजबूरी नहीं, और अपने पसीने से मिट्टी को सोना बनाने में कोई शर्म नहीं।
Labor Day से जुड़ी और शायरी/कोट्स/स्टेटस कहाँ पढ़ें?
आप Quotes, Status, Wishes और Labor शायरी पढ़ सकते हैं।

Ek sher yahan majbooree nahi, mazdoor hone par garv jataata hai, kyunki mitti ko sona banane wala pasina kabhi sharm ki baat nahi hota. Aage Status aur Wishes bhi padhein.