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Aitraaz Shayari

Na tareef ke mohtaj, na hi kisi baat par aitraaz.

Aitraaz shayari mein tareef ke mohtaj na hone ka gharoor hai, magar tareef milne par kabhi aitraaz na hona bhi. Isi andaaz mein Andaaz shayari bhi padhein.

Aitraaz Shayari - Bina Shikayat Wale Andaaz Ke Sher

हम तारीफ के मोहताज़ तो नहीं,
लेकिन आप करो तो ऐतराज़ भी नहीं...!

Ham taareeph ke mohataaz to nahin,
Lekin aap karo to aitaraaz bhee nahin...!

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फासले और बनालो ऐतराज़ हमने कब किया

फासले और बनालो ऐतराज़ हमने कब किया,
तुम भी ना भुला सकोगे मुझको वो अंदाज़ हूँ मैं !!

Phaasale aur banaalo aitaraaz hamane kab kiya,
Tum bhee na bhula sakoge mujhako vo andaaz hoon main !!

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Frequently Asked Questions

"तारीफ के मोहताज़ तो नहीं" पंक्ति में आत्मविश्वास कैसे झलकता है?
"हम तारीफ के मोहताज़ तो नहीं, लेकिन Aap करो तो ऐतराज़ भी नहीं" पंक्ति गहरे आत्मविश्वास के साथ हल्की नज़ाकत भी दिखाती है — खुद पर भरोसा है, फिर भी अपनों की तारीफ का स्वागत है।
फासले बनाने पर भी ऐतराज़ न करने वाली पंक्ति में कौन सा अंदाज़ छुपा है?
"Faasle और बनालो ऐतराज़ हमने कब किया, तुम भी ना भुला सकोगे मुझको वो Andaaz हूँ मैं" पंक्ति एक बेपरवाह मगर आत्मविश्वासी अंदाज़ दिखाती है — दूरियों की परवाह किए बिना यह यकीन है कि याद हमेशा बनी रहेगी।
ऐतराज़ शायरी में आत्मसम्मान और बेपरवाही का भाव कैसे एक साथ आता है?
दोनों पंक्तियाँ मिलकर आत्मसम्मान और बेपरवाह अंदाज़ का सुंदर मेल दिखाती हैं — यह Hindi शायरी की वो शैली है जहाँ बिना गुस्सा दिखाए भी अपनी बात मजबूती से कही जाती है।

Ek sher yahan khud faasle banane aur kabhi aitraaz na karne ka andaaz hai, phir bhi kabhi bhulaya na ja sakna. Aage Aap aur Faasle shayari bhi padhein.