हर एक चेहरे को ज़ख़्मों का आईना न कहो
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हर एक चेहरे को ज़ख़्मों का आईना न कहो,
ये ज़िंदगी तो है रहमत इसे सज़ा न कहो।
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हर एक चेहरे को ज़ख़्मों का आईना न कहो,
ये ज़िंदगी तो है रहमत इसे सज़ा न कहो।
Har Ek Chehre Ho Zakhmo Ka Aayina Na Kaho,
Ye Zidagi Toh Hai Rahmat Ise Sazaa Na Kaho.
Today's Shayari
इल्ज़ाम तो हर हाल में काँटों पे ही लगेगा,
ये सोचकर अक्सर फूल भी चुपचाप ज़ख्म दे जातें हैं !
Today's Joke
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