सरहदें तोड़ के आ जाती है
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सरहदें तोड़ के आ जाती है
किसी पंछी की तरह,
यह तेरी याद है जो बंटती नहीं
मुल्कों की तरह।
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सरहदें तोड़ के आ जाती है
किसी पंछी की तरह,
यह तेरी याद है जो बंटती नहीं
मुल्कों की तरह।
Sarhadein Tod Ke Aa Jati Hai
Kisi Panchhi Ki Tarah,
Yeh Teri Yaad Hai Jo BantTi Nahi
Mulkon Ki Tarah.
