बिखरी किताबें भीगे पलक और ये तन्हाई
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बिखरी किताबें भीगे पलक और ये तन्हाई,
कहूँ कैसे कि मिला मोहब्बत में कुछ भी नहीं।
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बिखरी किताबें भीगे पलक और ये तन्हाई,
कहूँ कैसे कि मिला मोहब्बत में कुछ भी नहीं।
Bikhri Kitaabein Bheege Palak Aur Yeh Tanhai,
Kahun Kaise Ke Mila Mohabbat Mein Kuchh Bhi Nahi.
