निखरती है मुसीबतों से ही शख़्सियत इन्सान की
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निखरती है मुसीबतों से ही शख़्सियत इन्सान की,,,,!!
जो चट्टानों से ही ना उलझे वह झरने किस काम के....!!
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निखरती है मुसीबतों से ही शख़्सियत इन्सान की,,,,!!
जो चट्टानों से ही ना उलझे वह झरने किस काम के....!!
Nikharatee hai museebaton se hee shakhsiyat insaan kee,,,,!!
Jo chattaanon se hee na ulajhe vah jharane kis kaam ke....!!
