खुली छतों के दिये कब के बुझ गये होते
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खुली छतों के दिये कब के बुझ गये होते...
कोई तो है जो हवाओं के पर कतरता है...!!
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खुली छतों के दिये कब के बुझ गये होते...
कोई तो है जो हवाओं के पर कतरता है...!!
Khulee chhaton ke diye kab ke bujh gaye hote...
Koee to hai jo havaon ke par katarata hai...!!
