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हमें अपने घर से चले हुए,
सरे राह उमर गुजर गई,
न कोई जुस्तजू का सिला मिला,
न सफर का हक ही अदा हुआ।
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हमें अपने घर से चले हुए,
सरे राह उमर गुजर गई,
न कोई जुस्तजू का सिला मिला,
न सफर का हक ही अदा हुआ।

Humein Apne Ghar Se Chale Hue,
Sar-e-Raah Umar Gujar Gayi,
Na Koi Justjoo Ka Sila Mila,
Na Safar Ka Haq Hi Adaa Hua.

Sad Shayari