मेरे किस्से सर-ए-बाज़ार उछाले उसने
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मेरे किस्से सर-ए-बाज़ार उछाले उसने,
जिस का हर ऐब ज़माने से छुपाया मैंने।
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मेरे किस्से सर-ए-बाज़ार उछाले उसने,
जिस का हर ऐब ज़माने से छुपाया मैंने।
Mere Kisse Sar-e-Bazaar Uchhaale Usne,
Jis Ka Har Aib Zamaane Se Chhupaya Maine.
