मुहब्बत का ये अंज़ाम कब सोचा था
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मुहब्बत का ये अंज़ाम कब सोचा था..
मुझे रुकने को कहकर, चला गया है वो..!
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मुहब्बत का ये अंज़ाम कब सोचा था..
मुझे रुकने को कहकर, चला गया है वो..!
Muhabbat ka ye anzaam kab socha tha..
Mujhe rukane ko kahakar, chala gaya hai vo..!
Today's Shayari
इल्ज़ाम तो हर हाल में काँटों पे ही लगेगा,
ये सोचकर अक्सर फूल भी चुपचाप ज़ख्म दे जातें हैं !
Today's Joke
दामाद ससुर सेः पापाजी आपकी लाडली ने नाक में दम कर रखा है..!
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Life is like a book. Each day like a new page. So let the first words you write be Good...
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