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खुली छतों के दिये कब के बुझ गये होते

Added By - Neha

खुली छतों के दिये कब के बुझ गये होते...
कोई तो है जो हवाओं के पर कतरता है...!!
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खुली छतों के दिये कब के बुझ गये होते...
कोई तो है जो हवाओं के पर कतरता है...!!

Khulee chhaton ke diye kab ke bujh gaye hote...
Koee to hai jo havaon ke par katarata hai...!!

Sad Shayari