किससे पैमाने वफ़ा बाँध रही है बुलबुल
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किससे पैमाने वफ़ा बाँध रही है बुलबुल,
कल न पहचान सकेगी गुल-ए-तर की सूरत।
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किससे पैमाने वफ़ा बाँध रही है बुलबुल,
कल न पहचान सकेगी गुल-ए-तर की सूरत।
Kis Se Paimane Wafa Baandh Rahi Hai Bulbul,
Kal Na Pehchan Sakegi Gul-e-Tar Ki Surat.
Today's Shayari
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Today's Joke
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