आँखें खुली हैं जबसे हूँ दर्द में ऐ दोस्त
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आँखें खुली हैं जबसे हूँ दर्द में ऐ दोस्त,
मुझको जगा के नींद से तूने अच्छा नहीं किया।
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आँखें खुली हैं जबसे हूँ दर्द में ऐ दोस्त,
मुझको जगा के नींद से तूने अच्छा नहीं किया।
Aankhein Khuli Hain Jab Se Hoon Dard Mein Ai Dost,
Mujhko Jaga Ke Neend Se Tu Ne Achchha Nahi Kiya.
