अपने क़ातिल की ज़ेहानत से परेशान हूँ मैं
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अपने क़ातिल की ज़ेहानत से परेशान हूँ मैं,
रोज़ इक मौत नए तर्ज़ की ईजाद करे।
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अपने क़ातिल की ज़ेहानत से परेशान हूँ मैं,
रोज़ इक मौत नए तर्ज़ की ईजाद करे।
Apne Qatil Ki Zehanat Se Pareshan Hun Main,
Roj Ik Maut Naye Tarz Ki Eejaad Kare.
