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Sharbat Shayari

Sharab chhodkar kahin sharbat bhar lein hum.

Sharbat shayari mein ek pyara khayal hai ki bina kisi hasad ke bachpane wali harkatein karein aur sharab chhodkar kahin sharbat bhar lein. Isi saadgi mein Harakat shayari bhi padhein.

आओ चलो!बच्चों-सा हरकत करते हैं,
बिना किसी भी हसद का बरकत करते हैं।
मुमकिन नहीं मिल जाएगा गुलाबी-फूल,
चलो शराब छोड़कर,कहीं शरबत भरते हैं।

Aao chalo!bachchon-sa harakat karate hain,
Bina kisee bhee hasad ka barakat karate hain.
Mumakin nahin mil jaega gulaabee-phool,
Chalo sharaab chhodakar,kaheen sharabat bharate hain.

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Frequently Asked Questions

शरबत शायरी का मुख्य भाव क्या है?
यह शायरी मासूमियत और सादगी की तरफ लौटने का न्योता देती है — "आओ चलो!बच्चों-सा हरकत करते हैं, बिना किसी भी हसद का बरकत करते हैं। मुमकिन नहीं मिल जाएगा गुलाबी-फूल, चलो शराब छोड़कर,कहीं शरबत भरते हैं।" यानी शराब जैसी नशीली ज़िंदगी छोड़कर शरबत जैसी मीठी, निश्छल Harakat (हरकत) की तरफ लौटने की बात कही गई है।
"चलो शराब छोड़कर, कहीं शरबत भरते हैं" पंक्ति में क्या संदेश छुपा है?
यह पंक्ति एक सांकेतिक संदेश देती है कि नशे और जटिलताओं से भरी ज़िंदगी छोड़कर, बचपन जैसी मासूम और मीठी Shararat की तरफ लौटना ही असली सुकून है। "शरबत" यहाँ सादगी और मिठास का प्रतीक बनकर आता है, "बिना किसी भी हसद का बरकत" यानी बिना किसी जलन या द्वेष के खुशहाली की कामना के साथ।

Ek sher yahan zindagi ko saadgi aur khushi se jeene ki seekh deta hai. Aage Shararat shayari bhi padhein.