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Manmani Shayari

Kabhi gam ki manmani, kabhi dil ki nadaani.

Manmani shayari mein duniya ke dil par haavi hone aur har taraf manmani chalne ka zikr hai, jo ek jhalak dekhte hi yaad reh jaati hai. Isi ehsaas mein Jhalak shayari bhi padhein.

पोंगल हंसी की बस्ती है
ये है खुशियों की राजधानी
आज के दिन चलती नहीं गम की मनमानी.

Pongal hansee kee bastee hai
Ye hai khushiyon kee raajadhaanee
Aaj ke din chalatee nahin gam kee manamaanee.

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ये दुनियां दिल पर हावी है
यहाँ अब सब की मनमानी है !!

Ye duniyaan dil par haavee hai
Yahaan ab sab kee manamaanee hai !!

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अब इसे तेरी मनमानी कहूँ
या दिल की नादानी
एक झलक देखी थी जो तेरी
आज़ भी याद है!

Ab ise teree manamaanee kahoon
Ya dil kee naadaanee
Ek jhalak dekhee thee jo teree
Aaz bhee yaad hai!

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Frequently Asked Questions

"मनमानी" संग्रह में पोंगल पर्व से जुड़ी शायरी क्या कहती है?
पोंगल के अवसर पर लिखी शायरी खुशियों का उत्सव मनाती है - "पोंगल हंसी की बस्ती है ये है खुशियों की राजधानी आज के दिन चलती नहीं गम की मनमानी." यह दिखाती है कि पोंगल के दिन सिर्फ खुशियाँ ही राज करती हैं, गम की कोई मनमानी नहीं चलती। हँसी-खुशी की बस्ती से जुड़ी और शायरियों के लिए Bastee देखें, या इसी पर्व की और शायरियों के लिए Pongal पढ़ें।
संग्रह में दुनिया की मनमानी पर क्या टिप्पणी की गई है?
एक शायरी दुनिया की बेपरवाही पर तंज कसती है - "ये दुनियां दिल पर हावी है यहाँ अब सब की मनमानी है !!" यह दिखाती है कि आज की दुनिया में दिल की भावनाओं से ज्यादा अपनी मर्जी चलाने का चलन हावी हो गया है। रोज़ के हालात से जुड़ी शायरियों के लिए Aaj देखें।
क्या संग्रह में एक झलक देखकर दिल हार जाने वाली कोई रोमांटिक शायरी है?
हाँ, एक मीठी शायरी कहती है - "अब इसे तेरी मनमानी कहूँ या दिल की नादानी एक झलक देखी थी जो तेरी आज़ भी याद है!" यह दिखाती है कि प्रिय की एक झलक इतनी गहरी छाप छोड़ गई कि आज भी वह पल याद है, चाहे इसे मनमानी कहें या दिल की नादानी। एक झलक और नजर से जुड़ी शायरियों के लिए Jhalak जरूर पढ़ें।
इस संग्रह से "मनमानी" शब्द के बारे में क्या समझ मिलती है?
यह संग्रह "मनमानी" को उत्सव की खुशी, दुनिया की बेपरवाही और दिल की मासूम नादानी - तीन अलग भावों में पिरोता है, जो इसे भावनात्मक रूप से विविध बनाता है। रोज़मर्रा के एहसासों से जुड़ी और शायरियों के लिए Din भी पढ़ सकते हैं।

Ek sher Pongal ke khushiyon bhare din gam ki manmani na chalne deta hai, to doosra dil ki nadaani ko manmani kehne ka faisla khud par chhodta hai. Aage Aaj aur Din shayari bhi padhein.