Maikhana Shayari
Gham-e-yaar bhulane ki koshish mein doobi jazbaati maikhana shayari.
Maikhana shayari mein saari botlein khol dene ki baat kahi gayi hai, taaki gham-e-yaar bhula diya jaaye, ek jazbaati aur shaayarana andaaz. Isi bhaav mein Sad shayari bhi padhein.
पिला दे आज खोल के सारे मयखाने की बोतलें ,
अगर गम-ऐ-यार भुल गये, तो तेरा मयखाना ही खरीद लूँगा...!!
Pila de aaj khol ke saare mayakhaane kee botalen ,
Agar gam-ai-yaar bhul gaye, to tera mayakhaana hee khareed loonga...!!
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Frequently Asked Questions
मयखाना शायरी में शराब और मयखाने का जिक्र किस तरह किया जाता है?
उर्दू-फ़ारसी शायरी में मयखाना, साक़ी और शराब जैसे प्रतीक सदियों पुरानी एक स्थापित काव्य-परंपरा हैं, जो दर्द और गम से पल भर की राहत या भुलावे को दर्शाने के लिए इस्तेमाल होते हैं, न कि शराब पीने की सलाह के तौर पर। पंक्ति है, "पिला दे आज खोल के सारे मयखाने की बोतलें, अगर गम-ऐ-यार भुल गये, तो तेरा मयखाना ही खरीद लूँगा...!!" यह शायर के गम की गहराई को बढ़ा-चढ़ाकर, इस पुरानी रूपक-परंपरा के जरिए बयां करने का एक तरीका है, जो Sad शायरी में गम को दर्शाने के कई और तरीकों में से एक है।
"गम-ऐ-यार भुला देने" की चाहत वाली पंक्ति असल में किस भावना की बात करती है?
यह पंक्ति असल में शराब की तारीफ नहीं, बल्कि उस बेइंतहा दर्द की बात करती है जिससे शायर किसी भी कीमत पर छुटकारा चाहता है, यहाँ मयखाना सिर्फ भूल जाने की एक प्रतीकात्मक जगह है, क्लासिकल शायरी की उसी पुरानी रूपक-परंपरा में। शेर है, "पिला दे आज खोल के सारे मयखाने की बोतलें, अगर गम-ऐ-यार भुल गये, तो तेरा मयखाना ही खरीद लूँगा...!!" यह गहरा दर्द उसी तरह का है जिसे Bhul जाने की चाहत में या खोए हुए Yaar के गम में अक्सर महसूस किया जाता है।
