आवश्यकता अनमोल वचन
अब रोना नहीं, खड़ा होना है।
यह आवश्यकता अनमोल वचन स्वामी विवेकानंद के उस प्रसिद्ध आह्वान पर आधारित है, जिसमें देश को मज़बूत हिम्मत और मज़बूत इरादों वाले लोगों की ज़रूरत बताई गई है। इसमें कमज़ोरी और शिकायत छोड़कर अपने बूते खड़े होने की सीख दी गई है। इसी हिम्मत से Sakaratmak से जुड़े वचन भी मेल खाते हैं।
आज हमारे देश को आवश्यकता है.
लोहे के समान मांसपेशियों और वज्र के समान स्नायुओं की.
हम बहुत दिनों तक रो चुके,
अब और रोने की आवश्यकता नहीं,
अब अपने पैरों पर उठ खड़े हो एवं मनुष्य बनो.
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Frequently Asked Questions
यह वचन किस आवश्यकता की बात करता है?
यह वचन देश की उस आवश्यकता की बात करता है जो लोहे जैसी मांसपेशियों और वज्र जैसे स्नायुओं की है। यह रोना छोड़कर अपने पैरों पर खड़े होने का आह्वान करता है।
इस वचन का मुख्य संदेश क्या है?
संदेश यह है कि अब और आंसू बहाने का समय नहीं, बल्कि उठकर मनुष्य बनने का समय है। यह आत्मबल और आत्मनिर्भरता पर जोर देता है।
यह विचार किन अन्य विषयों से जुड़ा है?
यह भाव Desh के प्रति कर्तव्य और सशक्त Manushy बनने के विचार से गहराई से जुड़ा है, और इसकी प्रेरणा Sakaratmak वचनों में भी झलकती है।
