ज़ख्म सब भर गए बस एक चुभन बाकी है
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ज़ख्म सब भर गए बस एक चुभन बाकी है,
हाथ में तेरे भी पत्थर था हजारों की तरह,
पास रहकर भी कभी एक नहीं हो सकते,
कितने मजबूर हैं दरिया के किनारों की तरह।
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ज़ख्म सब भर गए बस एक चुभन बाकी है,
हाथ में तेरे भी पत्थर था हजारों की तरह,
पास रहकर भी कभी एक नहीं हो सकते,
कितने मजबूर हैं दरिया के किनारों की तरह।
Zakhm Sab Bhar Gaye Bas Ek Chubhan Baki Hai,
Haath Mein Tere Bhi Patthar Tha Hazaron Ki Tarah,
Paas Rehkar Bhi Kabhi Ek Nahi Ho Sakte,
Kitne Majboor Hain Dariya Ke Kinaro Ki Tarah.
