वही तफरीक का आलम है बाद-ए-मर्ग भी यारों
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वही तफरीक का आलम है बाद-ए-मर्ग भी यारों,
न कतबे एक जैसे हैं न कब्रें एक जैसी हैं।
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वही तफरीक का आलम है बाद-ए-मर्ग भी यारों,
न कतबे एक जैसे हैं न कब्रें एक जैसी हैं।
Wahi Tafreeq Ka Aalam Hai Baad-e-Marg Bhi Yaaro,
Na Katbe Ek Jaise Hain, Na Qabrein Ek Jaisi Hain.
